ई-रिक्शा में बैठे स्कूली बच्चे
- फोटो : amar ujala
बस के नंबर को आरटीओ के एप के माध्यम से चेक किया तो पाया कि बस का इंन्श्योरेंस 2018 में एक्सपायर हो चुका है। 2016 के बाद फिटनेस भी नहीं कराई गई। इतनी खामियां मिलने के बाद अमर उजाला की टीम ने रामादेवी, गुमटी, पनकी क्षेत्र स्थित स्कूलों से छुट्टी के दौरान वाहनों की हकीकत परखी। ज्यादातर वैन प्राइवेट पंजीकरण पर दौड़ती दिखीं, जबकि उनका सीधा-सीधा उपयोग व्यवसायिक था। ई-रिक्शा और ऑटो भी स्कूलों से बच्चे ढोते नजर आए।
ई-रिक्शा में जाते स्कूली बच्चे
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सुरक्षा मानकों की उड़ रहीं धज्जियां
नियम कहते हैं कि स्कूली वैन की खिड़कियों पर लोहे की जाली और पीली पट्टी पर ‘स्कूल वैन’ लिखा होना चाहिए। पड़ताल में सामने आया कि पांच में चार वैनों में न जाली थी और न ही पहचान पट्टी। यानी बच्चे का सिर बाहर निकला तो बड़ा हादसा हो सकता है।
ई-रिक्शा में सवार स्कूली बच्चे
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आरटीओ के रिकॉर्ड में ये पंजीकृत वाहन
- मैक्सी कैब– 581
- मोटर कैब– 3599
- ओमनी बस– 158
- एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन बस– 258
क्षमता से अधिक ई-रिक्शा में बैठक कर जाते बच्चे
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चार माह में 32 मिनी बसों पर हुई कार्रवाई
आरटीओ प्रवर्तन राहुल श्रीवास्तव ने बताया कि अप्रैल से अगस्त तक विभाग ने 65 मिनी बस, 339 वाहनों के चालान किए गए हैं। 32 मिनी बस को बंद करने की कार्रवाई की गई है। लगातार अभियान चलाकर नियम विपरीत दौड़ रहे स्कूली वाहनों पर कार्रवाई की जा रही है।