कानपुर में कंबोडियाई साइबर ठगों के निशाने पर कानपुर, लखनऊ, दिल्ली, वाराणसी, इंदौर, जयपुर, गुरुग्राम, चंडीगढ़, लुधियाना, मुंबई जैसे बड़े शहर के लोग हैं। इनकी चेन दिन पर दिन बढ़ती जा रही है। यह सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने वालों को गिरोह में शामिल करते जा रहे हैं। चेन से जुड़े सदस्य म्यूल अकाउंट बनाने और क्रिप्टो करेंसी ट्रांसफर करने का काम कर रहे हैं। यह जानकारी क्राइम ब्रांच की साइबर सेल को अन्य शहरों की साइबर सेल और नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल से मिली है। इस पर काम शुरू हो गया है।
सिग्नेचर ग्रीन सिटी के रिटायर्ड बैंक कर्मी अनिल कुमार सिंह चौहान से क्रिप्टो करेंसी में निवेश का झांसा देकर ढाई करोड़ रुपये की ठगी हुई थी। उन्होंने साइबर क्राइम थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। साइबर सेल ने जोधपुर के मास्टरमाइंड महेंद्र, राम निवास, दिनेश विश्नोई को गिरफ्तार कर घटना का राजफाश किया। ठगी गई रकम में से 28 लाख मिल गए हैं। क्राइम ब्रांच के अधिकारियों के मुताबित कंबोडिया के साइबर ठग इस समय सक्रिय हैं। यह ऑनलाइन गेम, एप और सोशल मीडिया में दिखाए जाने वाले विशेष तरह के विज्ञापनों से युवकों को जोड़ लेते हैं।
अकाउंट नंबरों की होती है चेन
उन्हें कमीशन या फिर ऑनलाइन काम का झांसा दिया जाता है। हर वारदात के लिए यह अलग अलग चेन का इस्तेमाल करते है। यह चेन अकाउंट नंबरों की होती है, जो अलग-अलग शहरों की हो सकती है। अकाउंट में रुपये आने के बाद दूसरी चेन से लेनदेन शुरू हो जाता है। पहली चेन के अकाउंट के रुपयों को क्रिप्टो करेंसी में बदलवा देते हैं। ऐसे में अगर पुलिस या अन्य एजेंसी पकड़े, तो सिर्फ एक ही चेन का पता चल सके। बाकी की रकम सुरक्षित रह जाएगी।
लखनऊ की नामी मसाला फैक्टरी में आकर किया काम
साइबर सेल के प्रभारी सतीश यादव ने बताया कि आरोपी राम निवास ने लखनऊ की एक नामी मसाला फैक्टरी में कुछ महीने कार्य किया था। यहां पर महिलाएं और पुरुष कार्य करते हैं। राम निवास ने कई लोगों के अकाउंट खुलवा दिए। शुरुआत में उनके अकाउंट में कुछ रुपये डलवाए और उन्हें कमीशन दिया। इस तरह से उनके अकाउंट का संचालन खुद के हाथों में ले लिया। यही कार्य दूसरे शहरों में महेंद्र और दिनेश ने किया।
महेंद्र अब तक बेच चुका सवा करोड़ की क्रिप्टो करेंसी
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक जांच में सामने आया है कि महेंद्र अब तक सवा करोड़ रुपये की क्रिप्टो करेंसी कंबोडिया के साइबर सेल को बेच चुका है। वह पूर्व में भी साइबर अपराध में सक्रिय था। उसको इसके बदले कमीशन मिल रहा था।साइबर ठगों के शागिर्द नौकरी के लिए दूसरे राज्यों से आने वाले शहरों को चुनते हैं। यहां पर अधिक संख्या में प्रवासी एकजुट होते हैं। ऐसे में उनको अकाउंट खुलवाने या फिर क्रिप्टो करेंसी का ट्रांसफर कराने में मदद मिलती है। उनके नाम से सिम भी आसानी से मिल जाता है।