पार्क की दीवार तोड़ते मजदूर
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बड़े पेड़ काटने का ठेका दिया गया
इनके अलावा आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए दो प्लाटून पीएसी भी साथ थी। फोर्स से कुछ समय पहले केडीए के विशेष कार्याधिकारी सत शुक्ला, जोन-3 के प्रवर्तन प्रभारी अतुल राय, प्रभारी अभियंता माधवी कुशवाहा प्रवर्तन दस्ते और चार जेसीबी सहित मौके पर पहुंच गए। दस्ता देख वहां क्षेत्र के तमाम लोग एकत्रित हो गए। वे जेसीबी के सामने खड़े होकर कार्रवाई का विरोध करने लगे। केडीए अफसरों से उनकी बहस भी हुई। हालांकि जैसे ही पुलिस बल एकत्र होने लगा तो विरोध करने वाले लोग पीछे खिसकने लगे। इसके बाद अवैध कब्जे को घेरकर बुलडोजर चलाया गया। ठीक 60 मिनट की कार्रवाई में 41 साल पुराना अवैध कब्जा देखते-देखते ध्वस्त कर दिया गया। अतुल राय ने बताया कि भूखंड की बाउंड्री, पाथवे और एनजीटी की अनुमति से कुछ पेड़ तोड़े गए हैं। बड़े पेड़ काटने का ठेका दिया गया है।
समिति के लोगों और क्षेत्रीय लोगों मे जमकर हुई नोकझोंक
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क्षेत्रीय लोगों को अदालत से नहीं मिली राहत
साकेत नगर निवासी हरीश खत्री, तरुण कुमार जैन, भारतीश मिश्रा, रवि राठी, रामप्रकाश कुशवाहा, प्रदीप शुक्ला, मयंक कुमार गुप्ता, शिवकुमार मौर्या, प्रदीप भाटिया, दीपक शुक्ला, मधुरेश कुमार सिंघल, अवधेश त्रिपाठी, अभिनव मिश्रा, विजय भाटिया की ओर से सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत में वाद दाखिल किया गया था। यह 17 अक्तूबर 2024 को खारिज हो गया। जिला जज के यहां भी अक्तूबर 2024 में याचिका खारिज हो गई। क्षेत्रीय लोगों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की जिस पर दोबारा सुनवाई के आदेश हुए, लेकिन सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत ने दोबारा सुनवाई के बाद भी 10 जनवरी 2025 को दोबारा अर्जी खारिज कर दी। इस आदेश के खिलाफ फिर सेशन कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी जिसे इसी माह अपर जिला जज 19 राकेश सिंह ने खारिज कर दिया था। क्षेत्रीय लोगों ने हरे पेड़ों की कटान को रोकने के लिए एनजीटी में भी शिकायत की गई लेकिन वहां से भी कोई लाभ नहीं मिला।
केडीए ने भूखंड पर कब्जे के लिए चलाया बलडोजर
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ऑपरेशन महाकाल के बाद बदले माहौल में हो सकी कार्रवाई
जमीन पर राजनीतिक दांव-पेच भी खूब चले। यही वजह है कि कोर्ट का आदेश आने के बावजूद यहां से अतिक्रमण हटाने में समय लग गया। विपक्षी पार्टी के एक पूर्व जनप्रतिनिधि और सत्ता दल के कुछ जनप्रतिनिधियों के बीच लंबे समय तक खींचतान चली। सत्ता दल के जनप्रतिनिधियों का तर्क था कि यहां पर पार्क विकसित है, जो इस क्षेत्र में रहने वालों और वातावरण के लिहाज से अच्छा है। विपक्ष कोर्ट का हवाला देकर बार-बार केडीए पर दबाव बनाता रहा। चर्चा है कि प्रभावशाली लोगों की खींचतान में कार्रवाई में हीलाहवाली जारी थी। पुलिस की ओर से चलाए ऑपरेशन महाकाल के बाद परिस्थितियां बदलीं तो केडीए ने कोर्ट के आदेश का पालन करा दिया।