एलाइजा जांच में समय लगता है
जूनियर डॉक्टर के पर्ची देते वक्त पैथोलॉजी के दलाल ने पता कर लिया। बाद में आकर रोगी का सैंपल और पैसा ले लिया। इसके आधे घंटे बाद फर्जी हेपेटाइटिस निगेटिव रिपोर्ट लाकर दे दी। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला ने बताया कि सर्जरी के पहले हर रोगी की हेपेटाइटिस बी, सी और एचआईवी की रैपिड कार्ड से जांच कराई जाती है। पॉजिटिव आने पर दो-तीन बार जांच करके पुष्टि कर ली जाती है। इसे सत्यापित करने के लिए एलाइजा कराई जाती है। इस जांच में समय लगता है।
सख्ती के अधिकारियों को निर्देश दिए
सूत्रों का कहना है कि दलाल सैंपल लेकर जाते हैं और अपने मन से कंप्यूटर से रिपोर्ट बनाकर दे देते हैं। रोगियों और उनके परिजनों को तो पता नहीं होता। जल्दी रिपोर्ट मिलने के भ्रम में रहते हैं। प्राचार्य डॉ. काला का कहना है कि इससे रोगी और डॉक्टर दोनों को नुकसान होता है। परिजन अस्पताल में जांचों की भरपूर सुविधा है। तीमारदार किसी के झांसे में न आएं। बाहरी लोगों के आने पर सख्ती के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं।