कानपुर ब्रिक क्लिन ओनर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने की बैठक
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कानपुर ब्रिक क्लिन ओनर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों की बैठक बुधवार को आर्यनगर स्थित क्लब में हुई। इसमें लाल ईंटा पर जीएसटी न घटाने पर नाराजगी जताई गई। कारोबारियों ने कहा कि कोयले पर जीएसटी की दर पांच से बढ़ाकर 18 प्रतिशत कर दी गई। इससे लाल ईंट बनाना और महंगा हो गया है। ईंटा उद्योग के प्रति सरकार की उपेक्षापूर्ण नीति ठीक नहीं है। कारोबारियों को राहत देते हुए कंपोजीशन स्कीम लागू की जाए।
एसोसिएशन के अध्यक्ष गोपी श्रीवास्तव ने बताया कि मकान बनाने में ईंट प्रमुख निर्माण सामग्री है। सीमेंट पर सरकार ने जीएसटी की दर 10 प्रतिशत कम कर दी लेकिन लाल ईंट पर जीएसटी नहीं घटाई। जीएसटी काउसिंल ने 2017 में ईंट निर्माताओं पर लागू कंपोजीशन स्कीम को मार्च 2022 में समाप्त करके 01 के स्थान पर 06 और आईटीसी लेने पर पांच प्रतिशत के स्थान पर 12 प्रतिशत जीएसटी लगा दिया था। तब से व्यापारी जीएसटी दर को कम करने और समाधान योजना लाने की मांग कर रहे थे।
महामंत्री घनश्याम दास छाबड़ा ने कहा कि जीएसटी काउंसिल ने ईंटों पर कर दर न घटाकर सीधे जनहित की अनदेखी की है। ईंट भट्ठा सीजनल ग्रामीण कुटीर उद्योग है। ईंट भट्ठा उद्योग स्थानीय स्तर पर सबसे अधिक संख्या में रोजगार देने वाला उद्योग है जिसको सरकार अनदेखा कर रही है। पर्यावरण मंत्रालय भारत सरकार के निर्देश पर अधिकतर ईंट भट्ठों को जिग-जैग में परिवर्तित किया जा चुका है। इसमें प्रति भट्ठा करीब 50 लाख से अधिक का खर्च आया है लेकिन सरकार ने इसमें कोई मदद नहीं की। सरकार ने कई सरकारी योजनाओं में लाल ईंट को प्रतिबंधित कर दिया है। सरकार ईंट भट्ठा उद्योग को अनदेखा कर रही है।
पदाधिकारियों ने मांग उठाई कि सरकार 1.50 करोड़ टर्नओवर वाले व्यापारियों के लिए कंपोजीशन स्कीम लागू करते हुए एक प्रतिशत कर दर की श्रेणी में और 12 प्रतिशत के स्थान पर पांच प्रतिशत का कर करने का निर्णय ले। यहां पर राकेश वर्मा, राजकुमार बथावन, महेश उत्तम, विजय बदलानी, सूरज श्रीवास्तव, इकबाल सिंह यादव, संदीप मिश्रा, सूरज माखीजा आदि थे।