उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की घोषणा के बाद कई विधायकों के सपा में चले जाने से भाजपा को काफी नुकसान पहुंचा है। पार्टी इसकी भरपाई के लिए व्यूह रचना में जुट गई है।
प्रभावशाली नेताओं को पार्टी में शामिल करने का फैसला लिया गया है।
पिछड़ी और अन्य जातियों के आधा दर्जन से अधिक नेताओं के सपा का दामन थामने के बाद भाजपा इसकी भरपाई के लिए व्यूह रचना में जुट गई है। इसके तहत दूसरे दलों में पिछड़ी जाति के प्रभावशाली नेताओं को पार्टी में शामिल करने का फैसला लिया गया है। इनमें कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र के भी कई नेता शामिल हैं। जल्द ही इन्हें भगवा रंग में रंगने की घोषणा की जा सकती है।
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सूत्रों के मुताबिक, विपक्षी दलों से जुड़े क्षेत्र के पिछड़ी जाति के कई नेता तीन-चार दिन से लखनऊ में डेरा जमाए हुए हैं। भाजपा की तीसरे चरण की विधानसभा सीटों के लिए जारी होने वाली प्रत्याशियों की सूची के साथ पार्टी के नए सदस्यों का नाम भी सार्वजनिक कर दिया जाएगा। पता चला है कि कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र से पिछड़ी जाति के करीब पांच नेता ऐसे हैं, जिनसे भाजपा की टीमों ने संपर्क साधा है।
यह भी कहा जा रहा है कि पिछड़ी जातियों के जो भी नेता भाजपा में आ रहे हैं, उनको किसी न किसी विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में भी उतारा जाएगा। इस समय भाजपा के संपर्क में बताए जा रहे अधिकतर नेता दूसरे दलों से लोकसभा और विधानसभा चुनाव भी लड़ चुके हैं।