फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Kanpur: नगर निगम के नाम से कोई मैसेज आए तो सतर्क हो जाएं, हैक हो चुकी है वेबसाइट, महत्वपूर्ण डेटा हुआ गायब

Thu, 28 May 2026 11:52 PM IST
Shikha Pandey न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: नगर निगम की वेबसाइट हैक हो चुकी है। साइबर अपराधी मैसेज भेज एपीके फाइल डाउनलोड करा सकते हैं।
विज्ञापन
हैक हुई नगर निगम की वेबसाइट - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

अगर आपके पास 48 घंटे के अंदर नगर निगम के नाम से किसी तरह का मैसेज आए तो सतर्क हो जाएं। यह साइबर अपराधी की चाल हो सकती है। वह मैसेज के साथ लिंक भेजकर एपीके फाइल डाउनलोड कराकर न सिर्फ फोन पर कब्जा करेगा बल्कि ठगी की साजिश रच सकता है। इस तरह का खतरा नगर निगम की वेबसाइट हैक होने के बाद से मंडरा रहा है। नगर निगम और एनआईसी के विशेषज्ञ वेबसाइट को सुरक्षित और डेटा रिकवर करने में जुट गए हैं।
विज्ञापन


कमिश्नरी पुलिस के साइबर क्राइम विशेषज्ञों के मुताबिक साइबर अपराधियों ने वेबसाइट को डाटा चुराने के लिए हैक किया होगा। उसमें अधिकारियों के नाम, नंबर और उपभोक्ताओं की जानकारियां शामिल हैं। नगर निगम के टैक्स और राजस्व आदि की डिटेल भी रहती है। शातिर नगर निगम के डाटा से छेड़छाड़ कर उपभोक्ताओं को टैक्स का मैसेज भेज सकते हैं। इसके अलावा किसी तरह ओटीएस का मैसेज जारी कर संबंधित यूपीआई या बैंक अकाउंट में राशि ट्रांसफर कराने की साजिश रच सकते हैं।

हैकर ने कितना नुकसान पहुंचाया, अभी पता लगना मुश्किल
नगर निगम के अफसरों का दावा है कि जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, वेतन और पेंशन संबंधी कार्य और गृहकर जमा करने संबंधी डाटा अभी सुरक्षित है। हालांकि साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि हैकर वेबसाइट में कहां तक गया है, कितना डाटा एक्सेस किया है, इसका पता लगाना अभी मुश्किल है। हां इतना जरूर है कि नगर निगम ने कुछ डाटा अपने पास क्लाउड में सेव कर रखा होगा। इसे बाद में वेबसाइट में अपलोड करके नई सिक्योरिटी लगा दी जाएगी ताकि कोई हैकर इसे दोबारा न हैक कर पाए।
विज्ञापन

साइबर अटैक इस तरह पहुंचा सकता है नुकसान
- नगर निगम के कई तरह के विकास कार्य चल रहे हैं। कई तरह के प्रोजेक्ट को हरी झंडी मिलने की उम्मीद है। साइबर अपराधी डाटा में मौजूद आंकड़ों का इस्तेमाल कर फर्जी वेबसाइट बनाकर ठगी के लिए फर्जी टेंडर निकाल सकते हैं।
- जन्म या मृत्यु प्रमाण पत्र के डाटा हासिल कर किसी तरह के दस्तावेजों से छेड़छाड़ कर सकते हैं। इस रिकार्ड को वापस देने के लिए नगर निगम से रुपयों की मांग की जा सकती है। यह शातिरों के ऊपर है कि वह वेबसाइट में कितने अंदर तक घुस सके हैं।
- फर्जी वेबसाइट बनाकर वहां अधिकारियों के नंबर और अन्य जानकारियां देकर लोगों को ठगने का कार्य कर सकते हैं।
- ठेकेदारों और बड़े बिल्डरों को अधिकारियों के नाम से व्हाट्सएप कॉलिंग कर दूसरे खातों में या यूपीआई से रुपये मंगा सकते हैं।
- अधिकारियों और कर्मचारियों की वेतन आदि की जानकारी मिलने से उनको किसी तरह से ब्लैकमेल भी किया जा सकता है।
- साइबर विशेषज्ञों के मुताबिक वेबसाइट पर कई तरह के सुरक्षा चक्र रहते हैं। यह जांच में सामने आएगा कि कितना नुकसान हुआ है। फिलहाल समय पर डेटा रिकवर किया जा सकता है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें