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कानपुर: बैंक घोटाले के आरोपी सुजय देसाई को फिर नहीं मिली जमानत, 14 बैंकों के 4041 करोड़ हड़पने का आरोप

Thu, 17 Jun 2021 07:28 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

बैंक घोटाले के आरोपी हीरा कारोबारी उदय देसाई के बेटे और एफआईएल कंपनी के निदेशक सुजय देसाई की जमानत अर्जी कंपनी मामलों की सुनवाई के लिए गठित विशेष न्यायालय के न्यायाधीश विकास गुप्ता ने खारिज कर दी है।
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उदय देसाई, सुजय देसाई - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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कानपुर में कंपनी मामलों की सुनवाई के लिए गठित विशेष अदालत ने गुरुवार को 7820 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले के आरोपी हीरा कारोबारी उदय देसाई के बेटे और एफआईएल कंपनी के निदेशक सुजय देसाई की जमानत अर्जी खारिज कर दी है। न्यायाधीश विकास गुप्ता ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि सुजय पर 14 निजी बैंकों के लगभग 4041 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप है।
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यह एक सफेदपोश अपराध है, जोकि बहुत ही चालाकी से किया गया। यह अपराध जनता और समाज दोनों को प्रभावित करता है। उदय देसाई की भी जमानत अर्र्जी हाईकोर्ट ने 25 मार्च को खारिज कर दी थी। विभिन्न बैंकों से धोखाधड़ी के मामले में सीरियस फ्रॉड इंवेस्टिगेशन ऑफिस (एसएफआईओ) ने 29 व्यक्तियों और 40 कंपनियों समेत कुल 69 आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है।
 
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इसी मामले में उदय देसाई, उनके बेटे सुजय देसाई और रोटोमैक कंपनी के मालिक विक्रम कोठारी का बेटा राहुल 21 मार्च से जेल में हैं। सुजय की ओर से जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान तर्क रखा गया कि न तो कोई फ्रॉड हुआ है और न उन्होंने कोई अपराध किया है। जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं। 18 मार्च को उन्हें जांच के लिए समन भेजकर बुलाया और गिरफ्तार कर लिया।

उनका व्यापार पूरी तरह से वैध और रिजर्व बैंक द्वारा स्वीकृत है। वह बीमार हैं, उनकी मां की देखभाल करने वाला कोई नहीं है। पिछले दिनों उनके नानाजी का भी देहांत हो गया है। इस पर एसएफआईओ की ओर से अधिवक्ता कौशल किशोर शर्मा ने तर्क रखा कि सुजय कमोडिटीस एंड मर्चेंट ट्रेडिंग का व्यापार करने वाली फ्रॉस्ट इंटरनेशनल लिमिटेड के निदेशक थे।

उन्होंने लेटर ऑफ क्रेडिट के माध्यम से रकम ली जो एनपीए घोषित हो गई। कंपनी खातों में हेरफेर किया गया। कंपनी घाटे में चल रही थी और रुपया लेने के लिए उसे फायदे में दिखाया गया। बैंक समय-समय पर लिमिट बढ़ाती गई और इस तरह लगभग 4041 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की गई। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने सुजय के अपराध को गंभीर मानते हुए जमानत अर्जी खारिज कर दी। कहा कि बीमारी के आधार पर जमानत नहीं दी जा सकती। हालांकि जेल अधिकारियों को नियमानुसार मेडिकल ट्रीटमेंट देने के निर्देश दिए हैं।
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