नीचे की स्थिति जस की तस है
करीब 15 दिन पहले ऊपर धंसी सड़क पर डामरीकरण कर गड्ढों को बंद कर दिया गया, लेकिन नीचे की स्थिति जस की तस है। दीवारों से आरसीसी के टुकड़े टूट-टूटकर राहगीरों के ऊपर गिर रहे हैं। आसपास दुकान चलाने वाले लोगों का कहना है कि ब्रिज को सड़क से जोड़ने वाली जगह पर अब भी लकड़ी की प्लाई लगी हुई है।
कमजोर जोड़ के कारण दीवारें धंसीं
उसे नहीं हटाया गया, जिस कारण जोड़ सही से नहीं बन पाया। इसी कमजोर जोड़ के कारण दीवारें धंस रही हैं और ऊपर की आरसी भी टूटकर नीचे आ रही है। लोगों का आरोप है कि करोड़ों की लागत से बना यह ब्रिज तकनीकी खामियों और लापरवाही की भेंट चढ़ गया है। स्थानीय निवासी ने कहा कि "दो साल में अगर हाल यह है तो आगे क्या होगा।
बैरिकेडिंग और चेतावनी बोर्ड लगाने की मांग
रोज सैकड़ों छात्र, बुजुर्ग और दो पहिया वाहन चालक इसी रास्ते से गुजरते हैं। कभी कोई बड़ा हादसा हो गया तो जिम्मेदार कौन होगा। ग्रामीणों ने प्रशासन और रेलवे से मांग की है कि ब्रिज की तत्काल तकनीकी जांच कराई जाए और धंसी हुई दीवारों की स्थायी मरम्मत कराई जाए। बरसात के मौसम में मलबा गिरने से किसी की जान न जाए, इसके लिए बैरिकेडिंग और चेतावनी बोर्ड भी लगाने की मांग की गई है।