कई भवन बेहद जर्जर हो गए
विवि में वर्तमान में सिर्फ 35 नियमित शिक्षक हैं। उद्यान विभाग में मात्र एक ही नियमित शिक्षक हैं, कृषि महाविद्यालय में 105 में 93 पद खाली हैं। हालांकि वर्तमान में 16 नए शिक्षकों की नियुक्ति हुई है। 63 असिस्टेंट, 31 एसोसिएट और 18 प्रोफेसर की नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी किया जा चुका है। विवि के सूत्रों के अनुसार शिक्षकों की कमी होने से आईसीएआर से बजट नहीं जारी होता है। शासन से भी मरम्मत का फंड नहीं आता। वहीं विवि का इतिहास 100 साल से अधिक पुराना है। इस कारण कई भवन बेहद जर्जर हो गए हैं। राज्य सरकार की ओर से कंटीजेंसी फंड में 75 लाख का बजट दिया जाता है, जिसमें विवि के सारे खर्च करने होते हैं। बीजों को बेचने या अन्य स्रोत से होने वाली आय से सीएसए में गेस्ट फैकल्टी का वेतन निकलता है।
112 पदों पर नियुक्ति निकाली, जल्द होगी परीक्षा
नियमानुसार विवि और महाविद्यालयों में जितने पद सृजित हैं उनका 60 फीसदी भरने पर ही एक्रीडिटेशन मिलता है। शिक्षक-छात्र अनुपात 1:16 होना चाहिए। इस साल 112 पदों पर नियुक्ति निकाली है जिसकी लिखित परीक्षा जल्द होनी है। इसमें अगर 25-30 पद भी भर गए तो एक्रीडिटेशन के रास्ते खुल जाएंगे। कुछ समय पहले विवि ने 16 नए पाठ्यक्रमों की शुरुआत की थी, एक्रीडिटेशन के दौरान इनका जिक्र नहीं किया, जिस वजह से अंक नहीं मिले। वहीं विवि में लंबे समय से नियुक्तियां नहीं हुई थीं।
पिछले साल 49 शिक्षकों की नियुक्तियां निकाली थीं जिसमें से 25 का चयन हुआ। 16 ने ज्वॉइन किया और पांच शिक्षक कोर्ट में हैं। अभी भी 112 पदों पर नियुक्तियां निकाली हैं, जिनकी लिखित परीक्षा होनी है। शिक्षकों की कमी को जल्द ही निस्तारित किया जाएगा। विवि में अन्य परेशानियों पर भी कार्य किया जा रहा है। -कुलपति प्रो. आनंद कुमार सिंह