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15 दिन की मेहनत बेकार चली गई
बड़े-बुजुर्ग और बच्चे सभी मेले का लुत्फ उठाने आते थे, लेकिन इस बार बारिश ने मेले के रंग में भंग डाल दिया। झूला ठेकेदार केदार यादव ने बताया कि वह प्रतिवर्ष 15 दिन पहले आकर मेले की तैयारी शुरू करते हैं। इस बार भी तैयारी पूरी कर ली गई थी, लेकिन मौसम खराब होने से 15 दिन की मेहनत बेकार चली गई। 15 से 20 मजदूरों की मजदूरी और भाड़ा मिलाकर करीब ढाई लाख रुपये का नुकसान हुआ है।
भीषण बारिश के कारण मेला पूरी तरह फ्लॉप रहा
वहीं, गैर जनपदों से आए दुकानदारों ने बताया कि वे हर साल इस मेले में हजारों की बिक्री करते थे, लेकिन दोनों दिन भीषण बारिश के कारण मेला पूरी तरह फ्लॉप रहा। सैकड़ों वर्षों पुरानी परंपरा के अनुसार इस मेले में कंस वध और नाग नथैया लीला का आयोजन भी किया जाता था, जो इस वर्ष बारिश के कारण नहीं हो सका।