जान बचना मुश्किल हो सकता था
हालांकि, ब्रोंकोस्कोपी के तुरंत बाद मरीज की स्थिति में सुधार देखने को मिला। मरीज घनश्याम ने बताया कि यदि समय पर इस अस्पताल में उपचार नहीं मिलता, तो उनकी जान बचना मुश्किल हो सकता था। उन्होंने निशुल्क उच्चस्तरीय इलाज उपलब्ध कराने के लिए डॉ. अवधेश कुमार और उनकी पूरी टीम का आभार जताया। विभागाध्यक्ष डॉ. अवधेश कुमार ने बताया कि यह अत्यंत जटिल मामला था।
आगे भी जांच जारी है
मरीज के एक्स-रे में पहले की तुलना में काफी सुधार है। ऐसे मामलों में ब्रोंकोन्यूमोनिया, लंग एब्सेस, ब्रॉन्किएक्टेसिस अथवा फेफड़ों के कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की आशंका रहती है। संक्रमण के मूल कारण की पहचान के लिए आगे भी जांच जारी है। उन्होंने बताया कि इस उपचार में रेजीडेंट डॉक्टर डॉ. शुभम शुक्ला, डॉ. स्मृति, डॉ. अनमोल, डॉ. आलोक तथा ओटी टेक्नीशियन श्याम लाल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।