जाति-बिरादरी और धर्म के नाम पर मांग रहे हैं वोट
इस बीच शहर में रोजाना निकलने वाले टनों कूड़े को प्लांट में डालने के बजाए सड़कों के किनारे फेंका जा रहा है। उससे निकलने वाला जहरीला धुआं लोगों को परेशान कर रहा है। चुनाव में इस समस्या पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार जाति-बिरादरी और धर्म का हवाला देकर वोट मांग रहे हैं।
रोजाना निकलता है 40 से 50 टन कूड़ा
दरअसल एक लाख से ज्यादा की आबादी वाले शहर में रोजाना औसतन 50 टन कूड़ा निकलता है। हैरानी यह है कि इतनी बड़ी मात्रा में निकलने वाले कूड़ों का निस्तारण नहीं हो रहा है। नगर पालिका की टीम शहर के अलग-अलग इलाकों से कूड़ों को उठाकर उसे अलग-अलग सड़कों के किनारे डाल देती है।
कूड़े का निस्तारण न होना, तरक्की में बाधक
कानपुर जाने वाली सड़क हो या फिर दिल्ली की ओर जाने वाली सड़क। दोनों ओर दूर-दूर तक सड़क किनारे कूड़ा ही कूड़ा दिख रहा है। शहर को गांवों से जोड़ने वाली छोटी सड़कों को भी दोनों तरफ कूड़ों से पाट दिया गया है। रोजाना निकलने वाले कूड़ों का निस्तारण न होना शहर की तरक्की की राह में रोड़ा बन रहा है।
क्रिकेट ग्राउंड की प्रस्तावित जमीन को बना डाला कूड़ाघर
नगर पालिका ने शहर के करीब एफएफडीसी के पास स्टेडियम के लिए अधिगृहित हो चुकी करीब 100 एकड़ जमीन को भी नहीं छोड़ा है। पहले वहां खनन माफिया ने जगह-जगह मिट्टी खोद डाली थी। पुलिस की कार्रवाई के बाद खनन रुका तो उन गड्ढों में पालिका कर्मी कूड़ा डाल रहे हैं। इसके अलावा शहर के तालाब में भी कूड़ा डाला जा रहा है। उसका अस्तित्व खत्म हो रहा है।