पुलिस अधीक्षक कार्यालय के बाहर मौजूद महिला
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पुलिस की लापरवाही का एक गंभीर मामला सामने आया है। तीन महिलाओं ने घर में घुसकर गर्भवती को पीटकर गंभीर रूप से घायल कर दिया। आरोप है कि चाह माह के गर्भ में पल रहे बच्चे की वजह से उसके पेट में तेज दर्द होने लगा खून बहने लगा और पेट फूल गया। शिकायत करने थाने पर गई तो भगा दिया गया। पीड़िता ने पुलिस अधीक्षक से गुहार लगाई है।
कोतवाली तिर्वा क्षेत्र के ग्राम बौरापुर निवासी गर्भवती महिला का आरोप है कि 28 अगस्त 2026 की सुबह करीब छह बजे वह अपने घर में झाड़ू लगा रही थी। तभी गांव की ही तीन महिलाएं उसके घर में घुस आईं और जमीन हड़पने की बात कहते हुए गंदी-गंदी गालियां देने लगीं। जब पीड़िता ने गाली देने से मना किया तो तीनों ने मिलकर उसे लात-घूंसों और थप्पड़ों से बेरहमी से पीट दिया। मारपीट इतनी भयानक थी कि महिला के गर्भ में पल रहे चाह माह के बच्चे की वजह से उसके पेट में तेज दर्द होने लगा, खून बहने लगा और पेट फूल गया।
जाते-जाते आरोपी महिलाएं जान से मारने की धमकी भी दे गईं। दर्द से तड़पती गर्भवती महिला न्याय की उम्मीद लेकर तिर्वा थाने पहुंची, लेकिन वहां उसे न्याय नहीं, बल्कि अनदेखी मिली। आरोप है कि थाना पुलिस ने उसकी रिपोर्ट लिखने से इन्कार कर दिया और उसे थाने से भगा दिया। एक गर्भवती महिला, जिसके पेट में पल रहे बच्चे की जान खतरे में है, थाने के चक्कर काट रही है लेकिन पुलिस कान में तेल डाले बैठी है। थाने में सुनवाई न होने से परेशान होकर पीड़िता ने दो सितंबर 2026 को पुलिस अधीक्षक को शिकायती पत्र देकर न्याय की गुहार लगाई है। यह घटना सवाल खड़ा करती है कि जब थाने ही फरियादियों को भगाएंगे तो गरीब महिला कहां जाएगी। महिला ने आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है। मामले में प्रभारी निरीक्षक तिर्वा संजय शुक्ला का कहना है कि आरोप निराधार है। महिला थाने पर शिकायत लेकर नहीं आई थी। एसपी विनोद कुमार ने बताया कि तिर्वा कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक को मामले की जांच कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।