कन्नौज कांड पर जिला एवं सत्र न्यायालय के अधिवक्ता वरुण द्विवेदी ने बताया कि चाहे कोई भी मुकदमा हो वह गवाही और साक्ष्य पर निर्भर करता है। जितनी जल्दी गवाही पूरी होगी और पुलिस के पास मजबूत साक्ष्य होंगे, उतनी जल्दी कोर्ट का फैसला आ जाएगा।
सरकार ने भारतीय न्याय संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम में कई नए प्रावधान किए हैं। इसके तहत नाबालिग संबंधी अपराधों में फास्ट ट्रैक कोर्ट की तरह ही मुकदमों का ट्रायल किया जाता है और पुलिस को 30 दिन के अंदर चार्जशीट दाखिल करनी होती है। जितनी जल्दी गवाही होगी, उतनी जल्दी कोर्ट का फैसला आ जाएगा। पूर्व ब्लॉक प्रमुख नवाब सिंह यादव का मामला भी इस परिधि के अंतर्गत आता है। इसलिए पुलिस इस मामले में एक माह के अंदर ही चार्जशीट और सभी साक्ष्य कोर्ट में पेश करने की तैयारी कर रही है।
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किशोरी से दुष्कर्म के मामले में पूर्व ब्लॉक प्रमुख नवाब सिंह यादव के खिलाफ दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के अंतर्गत मुकदमा दर्ज किया गया है, जबकि पीड़िता की बुआ और उसके छोटे भाई नीलू यादव को सबूतों से छेड़छाड़ तथा आपराधिक षड़यंत्र में शामिल होने के कारण सह आरोपी बनाया गया है। इस पूरे मामले का ट्रायल पॉक्सो कोर्ट में होगा।
सपी अमित कुमार आनंद के मुताबिक पुलिस के पास आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं। इसमें इलेक्ट्रानिक साक्ष्य के तौर पर कॉल रिकॉर्डिंग, कॉल डिटेल, सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल वीडियो क्लिप शामिल हैं, तो मजबूत वैज्ञानिक साक्ष्य के रूप में फारेंसिक लैब की रिपोर्ट भी है। इसी आधार पर पुलिस जल्द ही आरोप पत्र तैयार कर कोर्ट में दाखिल करेगी।
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गवाही पर निर्भर करता मुकदमों का निर्णय
जिला एवं सत्र न्यायालय के अधिवक्ता वरुण द्विवेदी ने बताया कि चाहे कोई भी मुकदमा हो वह गवाही और साक्ष्य पर निर्भर करता है। जितनी जल्दी गवाही पूरी होगी और पुलिस के पास मजबूत साक्ष्य होंगे, उतनी जल्दी कोर्ट का फैसला आ जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने नाबालिग के साथ होने वाले अपराधों में मुकदमों का ट्रायल जल्द शुरू करने तथा 90 दिन के अंदर निर्णय सुनाने के आदेश दिए हैं। भारतीय न्याय संहिता में इस प्रकार के मुकदमों के लिए समय सीमा भी तय की गई है।
महिला संबंधी अपराधों में कोर्ट संवेदनशील
कन्नौज बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता विजय सारस्वत ने बताया कि महिला संबंधी अपराधों में कोर्ट हमेशा संवेदनशील रहता है। कोलकाता में महिला डॉक्टर के साथ हुई दरिंदगी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया।
खासकर दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के मामले में यदि पुलिस के पास पर्याप्त साक्ष्य रहते हैं तो निश्चित रूप से दोषी को इसमें जल्द सजा मिलती है। भारतीय न्याय संहिता, भारतीय साक्ष्य अधिनियम तथा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता में कई नए और कड़े प्रावधान किए गए हैं, जिससे दोषी को कड़ी सजा मिलती है।
बुआ और नीलू यादव की कस्टडी रिमांड पर आज होगी सुनवाई
किशोरी दुष्कर्म कांड में सह आरोपी पूर्व ब्लॉक प्रमुख नीलू यादव और पीड़िता की बुआ को पुलिस कस्टडी रिमांड पर लेगी। इसके लिए बुधवार को पुलिस ने पॉक्सो कोर्ट में अर्जी दाखिल की, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है। आज इस संबंध में कोर्ट सुनवाई करेगा, जिसमें दोनों आरोपियों की पेशी जिला कारागार से वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से होगी।
किशोरी से दुष्कर्म के मुख्य आरोपी नवाब सिंह यादव को बचाने के लिए उसके छोटे भाई नीलू यादव ने पीड़िता की बुआ को 10 लाख रुपये का लालच दिया था और किशोरी का मेडिकल परीक्षण न कराने, कोर्ट में बयान न देने के एवज में चार लाख रुपये बुआ के एक परिचित के खाते में हस्तांतरित भी किए थे।
इसी आधार पर पुलिस ने नीलू को भी सह आरोपी बनाया है। नीलू ने मंगलवार को कोर्ट में समर्पण कर दिया। बुधवार को इस मामले के विवेचक सदर कोतवाल कपिल दुबे ने पॉक्सो कोर्ट में पुलिस कस्टडी रिमांड के लिए अर्जी दाखिल की जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है।
एसपी अमित कुमार आनंद ने बताया कि बृहस्पतिवार को कस्टडी रिमांड पर कोर्ट सुनवाई करेगा और दोनों आरोपियों की जिला जेल से वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेशी होगी। न्यायालय का आदेश मिलते ही दोनों को जेल से लाकर पूछताछ की जाएगी और रुपयों के लेन देन के संबंध में साक्ष्य एकत्र किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि एक सप्ताह के अंदर चार्जशीट तैयार कर कोर्ट में दाखिल की जाएगी। इसके बाद मुकदमे का ट्रायल शुरू होगा और पुलिस फास्ट ट्रैक की तरह पैरवी करेगी।