फर्रुखाबाद के एआरटीओ कार्यालय में थोड़े से लालच में ही फिटनेस के मानकों की धज्जियां उड़ा कर प्रमाण पत्र जारी करने से अधिकारी नहीं चूकते हैं। जब हादसा होता है तो कुछ महीनों तक नियम कानून का पाठ पढ़ाया जाता है। मैनपुरी में दो वर्ष पहले हुई घटना के बाद सादे माडल से स्लीपर में तब्दील हुई बसों को विमल ने लेनदेन कर स्लीपर के रिकार्ड में दर्ज करवा दिया था।
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कन्नौज बस-ट्रक हादसा
- फोटो : अमर उजाला
जिस बस से दुर्घटना हुई है वह भी उन्हीं में से एक है। एआरटीओ कार्यालय में वाहनों की फिटनेस को लेकर मानकों का बीस प्रतिशत की अनदेखी की जाती है। फिटनेस देते समय सबसे पहले बस के आगे के पहिये की स्थिति देखना चाहिए। वाहन की ओवरआल बॉडी की स्थिति, ब्रेक लाइट, इंडिकेटर के काम करने की स्थिति, बस में प्रेशर हार्न न हो, हेडलाइट लो और हाई में जलने या नहीं जलने, नंबर आफ सीट, इंमरजेंसी डोर से निकलने की स्थिति है।
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कन्नौज हादसा
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बस में अग्नि शमन यंत्र, चालक ड्रेस में और जूते पहने होने आदि मानकों को देखकर ही फिटनेस देने का नियम है। आल इंडिया परमिट में चलने वाली बसों में दो ड्राइवर वा वर्दी दुरुस्त होने चाहिए। स्कूल बसों में दो अग्निशमन यंत्र एक आगे व दूसरा पीछे के गेट के पास होना चाहिए। इसके अलावा बस के सभी कागजात पूरे और कोई टैक्स भी बकाया नहीं होना चाहिए। ये सब होने पर ही फिटनेस प्रमाण पत्र मिलना चाहिए। होता इसका उलटा है।
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कन्नौज हादसा
- फोटो : अमर उजाला
ऐसे वाहनों को फिटनेस का प्रमाण पत्र दे दिया जाता है जो कई वर्ष पुराने और मानकों से परे हैं। वर्ष 2018 में 13 जून को विमल की बस से मैनपुरी में हादसा हुआ था। दुर्घटना में 18 लोगों की मौत हुई थी। तब पुलिस व प्रशासन ने सख्ती की और विमल की कई बसों को बंद कर दिया था। समय बीतने पर मामला ठंडा हुआ तो विमल ने अपनी आठ सामान्य बसों को स्लीपर में परिवर्तित करवाकर आरटीओ कानपुर की पैरवी से स्लीपर में दर्ज करवा दिया था।
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कन्नौज हादसा
- फोटो : अमर उजाला
इसमें छिबरामऊ में शुक्रवार को दुर्घटनाग्रस्त हुई बस यूपी 76 के 7255 बस भी शामिल है। आरआई जीवन कुमार ने बताया कि वह वाहनों को फिटनेस प्रमाण पत्र देते समय वाहन का स्वयं भौतिक सत्यापन करते हैं। सभी मानकों के पूरा होने पर ही फिटनेस प्रमाण पत्र जारी करते हैं। पहले के वर्षों में क्या होता रहा इसके बारे में जानकारी नहीं है।
बसों के पंजीयन में 22ए पार्ट टू के फर्जी फार्म लगाने का खेल
पूरे भारत में बसों की बॉडी बनाने के लिए सात फर्म ही अधिकृत हैं। उनमें जिले में सीआईआरटी व एआरआई के फार्म ही बसों के पंजीयन के समय लग कर आते हैं। एआरटीओ कार्यालय में फर्जी कागजात बनाने में माहिर दलाल अधिकारियों से मिलीभगत कर बॉडी मेकिंग कंपनी के फर्जी प्रपत्र तैयार कर पंजीयन में लगा कर अपना काम करवा लेते हैं। हालांकि एआरटीओ कार्यालय के अधिकारी दावा कर रहे हैं कि उनके कार्यकाल में ऐसा कुछ भी नहीं हुआ है।
चंद रुपयों के लालच में जिंदा जल गए 20 लोग
कन्नौज के घिलोई गांव में हुए हादसे के पीछे अफसरों की जेब भरने की प्रवृत्ति भी काफी हद तक जिम्मेदार रही। चंद रुपयों की खातिर जिम्मेदार अफसरों ने कई जिंदगियों को मौत की नींद सुला दिया। आश्चर्य की बात यह रही कि इस पूरे मामले में मौत के आंकड़ों पर पर्दा भी डालने का प्रयास किया गया। वर्ष 2018 में जिस ट्रैवलिंग एजेंसी की बस में सफर कर रहे 18 लोगों की मौत हो चुकी थी उसी एजेंसी की बस जिले में बेधड़क यात्रियों को ढो रही थीं।