मां से पूछा था...इन मंदिरों में गई हो
42 साल के एमसीए कृष्ण कुमार बताते हैं कि वह एक मल्टीनेशनल कंपनी में इंजीनियर के रूप में कार्यरत थे। कर्नाटक राज्य के मैसूर में 10 लोगों का संयुक्त परिवार है। मां घर के सारे काम करती थीं। एक दिन कंपनी से घर आकर मैंने कुछ प्रमुख मंदिरों के नाम गिनाते हुए मां से पूछा कि मां कभी इन मंदिरों के दर्शन करने गई हो।
तब तय किया था कि देश-विदेश के मंदिर घुमाऊंगा
इतना सुनते ही वह नम आंखों से बोली बेटा आज तक वह अपने घर के पास वाले मंदिर भी नहीं जा सकी है। इतना सुनते ही वह भी दुखी हो गया और तय कर लिया कि मां को देश ही नहीं बल्कि आस पास के अन्य देशों के भी प्रसिद्ध मंदिरों के दर्शन कराऊंगा।
नौकरी से इस्तीफा दिया,स्कूटर लेकर निकल पड़ा
मां चूड़ारत्ना की रजामंदी मिलने के बाद उसने नौकरी से इस्तीफा दे दिया। कंपनी वालों ने बहुत समझाया, लेकिन जब मां के बारे में बताया तो सभी ने उसका हौसला भी बढ़ाया। हेलीकाप्टर, ट्रेन या अन्य साधन से यात्रा कराने के लिए धनराशि न होने पर उसने अपनी ही पुरानी स्कूटर से मंदिरों के भ्रमण के लिए निकल पड़ा।
हर कोई कर रहा है तारीफ
16 जनवरी 2018 को केरल के घर से शुरु यह धार्मिक यात्रा नेपाल, भूटान व म्यंमार के मंदिरों तक होने के बाद भारत के कई राज्य तक घूम चुकी है। पांच अप्रैल 2023 को चित्रकूट पहुंचे मां बेटे को देखकर और उनके संकल्प को जानकर सभी प्रभावित हुए हैं।