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ज्योति हत्याकांड: पीयूष से अधिक बात होना मनीषा के षड़यंत्र में शामिल होने का सबूत नहीं, डायरी में जिक्र नहीं

Mon, 09 Dec 2024 12:17 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर

सार

कानपुर की ज्योति हत्याकांड में दोषी ज्योति के पति पीयूष श्यामदासानी समेत पांच दोषियों की उम्रकैद की सजा को हाईकोर्ट ने बरकरार रखा है। मुकदमे में आरोपी पीयूष की कथित प्रेमिका मनीषा मखीजा को हाईकोर्ट से राहत मिल गई है। पर्याप्त सबूत न होने के आधार पर हाईकोर्ट ने मनीषा को दोषमुक्त करार दिया है।
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Jyoti Murder Case - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कानपुर की ज्योति हत्याकांड में पीयूष समेत पांच दोषियों की सजा को माफ करने से जहां हाईकोर्ट ने इन्कार कर दिया वहीं सेशन कोर्ट द्वारा दोषी ठहराई गई मनीषा मखीजा के खिलाफ पर्याप्त सबूत न होने की बात कहते हुए उसकी दोषमुक्त का आदेश सुनाया। 
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हाईकोर्ट ने माना कि मनीषा, पीयूष से अच्छी तरह परिचित थी, दोनों पड़ोसी थे, दोनों में कई बार फोन से बातचीत हुई। लेकिन इससे यह नहीं माना जा सकता कि पीयूष और अन्य अभियुक्तों के बीच हत्या के लिए रचे गए षड़यंत्र में भी मनीषा शामिल थी। मनीषा की पीयूष के अलावा अन्य अभियुक्तों से कोई बातचीत भी नहीं हुई।

पीयूष-मनीषा के संबंधों के बारे में डायरी में कुछ भी नहीं लिखा
हाईकोर्ट ने कहा कि पीयूष और मनीषा की कॉल डिटेल रिपोर्ट से यह साफ है कि दोनों अक्सर बातचीत करते थे, लेकिन मनीषा की पीयूष के अलावा अन्य अभियुक्तों से किसी तरह की बातचीत के कोई सबूत नहीं हैं। पुलिस ने ज्योति की ससुराल से बरामद डायरी और उसकी स्कूल डायरी की लिखावट की मिलान के लिए एफएसएल भेजा था और एफएसएल रिपोर्ट से लिखावट की मिलान भी हो गई थी। 
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ज्योति की डायरी में लिखी बातों से यह तो साफ है कि वह अपने वैवाहिक जीवन से खुश नहीं थी, लेकिन उसने पीयूष-मनीषा के अनैतिक संबंधों के बारे में डायरी में कुछ भी नहीं लिखा था।

ज्योति के पिता ने बयान में कहा था कि पीयूष और ज्योति की शादी के पहले पीयूष और मनीषा की शादी की बातचीत भी चली थी, लेकिन कुंडली न मिलने के कारण रिश्ता तय नहीं हो सका था। बुआ ने बयान में बताया था कि ज्योति ने उन्हें बताया था कि घटना के तीन-चार दिन पहले पीयूष के फोन की घंटी बजने पर अचानक ज्योति ने फोन उठा लिया था तो मनीषा उसे पीयूष समझकर कह रही थी कि शादी के लिए एक लड़का उससे मिलने आ रहा है, उसे ज्योति को हटाना होगा। सिर्फ यह बयान पीयूष के षड़यंत्र में मनीषा के शामिल होने का पर्याप्त सबूत नहीं है। 
 

अभियोजन का कहना है कि 27 जुलाई को हुई घटना से पहले भी 13 व 21 जुलाई को दो बार हत्या की योजना बनाई गई थी लेकिन सफल नहीं हो सकी। मनीषा को शादी के लिए लड़का 24 जुलाई को मिलने आने वाला था। इससे भी यह साफ है कि हत्या का षड़यंत्र पहले से रचा जा चुका था और मनीषा उसमें शामिल नहीं थी।

ज्योति ने दी थी पीयूष-मनीषा के संबंधों की जानकारी
पिता ने गवाही में कहा है कि शादी से पहले उन्होंने पीयूष के चरित्र के बारे में पता किया था, लेकिन उन्हें किसी लड़की से पीयूष के संबंधों की जानकारी नहीं हुई थी। पीयूष-मनीषा के संबंधों की जानकारी उन्हें ज्योति के बताने के बाद हुई। एक गवाह ने यह भी बताया था कि मनीषा के घर वह शादी का प्रस्ताव लेकर गए थे, लेकिन मनीषा की लंबाई कम होने के कारण रिश्ता मंजूर नहीं हुआ था। अगर मनीषा शादी नहीं करना चाहती तो वह पीयूष से संबंधों के बारे में बता सकती थी। पीयूष और मनीषा की कॉल डिटेल रिपोर्ट के आधार पर यह बात तो साफ होती है कि दोनों के बीच सैकड़ों की संख्या में फोन कॉल्स और एसएमएस हुए, लेकिन बाकी चार अभियुक्तों में से किसी से भी मनीषा की बातचीत के कोई सबूत अभियोजन के पास नहीं हैं। इन सब आधारों पर हाईकोर्ट ने मनीषा को षड़यंत्र में शामिल न मानकर सजा से राहत दे दी।

सेशन कोर्ट ने मनीषा को माना था षड़यंत्र में शामिल
दो साल पहले सेशन कोर्ट ने सुनाए सजा के फैसले में माना था कि पीयूष ने ज्योति के अपहरण व हत्या का आपराधिक षड़यंत्र रचकर उसे अपहरणकर्ताओं के हवाले किया। साजिशन ज्योति के शव को न केवल छिपाया बल्कि गलत सूचना देकर पुलिस को भ्रमित भी किया। मनीषा प्रत्यक्ष रूप से घटनास्थल पर मौजूद नहीं थी लेकिन पीयूष और सहअभियुक्तों के साथ लगातार फर्जी नामों से लिए गए सिम लगाकर मोबाइल से बात करना मनीषा को षड़यंत्र में शामिल होने की पुष्टि करता है। इसी तरह अवधेश, रेनू और सोनू ने ज्योति का अपहरण कर हत्या की और जेवर लूट लिए। आशीष ने भी हत्या और सबूत मिटाने में मदद की। इसलिए सभी हत्या के दोषी हैं।

 

मनीषा को बरी करने के खिलाफ करेंगे अपील
हाईकोर्ट के फैसले का सम्मान करता हूं लेकिन फैसले में मनीषा मखीजा को बरी किए जाने से दुखी हूं। मेरा मानना है कि मनीषा भी मेरी बेटी की हत्या के लिए उतनी ही दोषी है जितने बाकी अभियुक्त। मनीषा की वजह से ही मेरी बेटी की हत्या हुई। अधिवक्ताओं संग विचार-विमर्श कर हाईकोर्ट के फैसले की समीक्षा के बाद मनीषा को बरी किए जाने के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करूंगा। बेटी को पूर्ण न्याय के लिए आखिरी सांस तक लड़ता रहूंगा। - शंकरलाल नागदेव, ज्योति के पिता

 

तो इतने दिन क्यों शांत रहे परिजन
मनीषा के अधिवक्ता कमलेश पाठक ने बताया कि हाईकोर्ट को अपील की सुनवाई के दौरान अभियोजन की कहानी में भी कुछ छेद दिखाई दिए। पिता और बुआ ने बयान में कहा था कि घटना के कुछ दिन पहले ज्योति ने फोन कर पीयूष और मनीषा के बीच संबंध होने और उसे रास्ते से हटाने की कोशिश करने की बात बताई थी, लेकिन उन लोगों ने 12-14 दिन बाद रक्षाबंधन पर घर आने पर समझाने की बात कही थी। पिता ने न तो रिश्ता कराने वाले पीयूष के पड़ोसी बलराम से इस बात का जिक्र किया और न ही पीयूष के घरवालों से बातचीत की। इसे ज्योति की हत्या के बाद अभियोजन द्वारा यह कहानी गढ़ा जाना माना गया।

ज्योति हत्याकांड: मनीषा को राहत, पीयूष समेत पांच को भुगतनी होगी उम्रकैद
कानपुर की ज्योति हत्याकांड में दोषी ज्योति के पति पीयूष श्यामदासानी समेत पांच दोषियों की उम्रकैद की सजा को हाईकोर्ट ने बरकरार रखा है। मुकदमे में आरोपी पीयूष की कथित प्रेमिका मनीषा मखीजा को हाईकोर्ट से राहत मिल गई है। पर्याप्त सबूत न होने के आधार पर हाईकोर्ट ने मनीषा को दोषमुक्त करार दिया है।

 

मध्यप्रदेश के जबलपुर निवासी शंकरलाल नागदेव ने बेटी ज्योति की शादी कानपुर के बिस्कुट व्यापारी पीयूष श्यामदासानी से की थी। 27 जुलाई 2014 को ज्योति की अपहरण के बाद हत्या कर दी गई थी। पहले तो पीयूष ने पुलिस को लुटेरों द्वारा ज्योति के अपहरण की कहानी सुनाई थी लेकिन बाद में पुलिस ने पीयूष द्वारा ही षड़यंत्र के तहत भाड़े के हत्यारों से ज्योति की हत्या करवाने का खुलासा किया था। 

 

इसमें पीयूष व उसकी कथित प्रेमिका मनीषा मखीजा समेत छह आरोपियों को जेल भेजा गया था। अपर जिला जज प्रथम की अदालत ने 21 अक्तूबर 2022 को पीयूष श्यामदासानी, सोनू कश्यप, रेनू उर्फ अखिलेश कनौजिया, आशीष कश्यप, अवधेश चतुर्वेदी और मनीषा मखीजा को हत्या व षड़यंत्र में शामिल होने के अपराध में उम्रकैद की सजा सुनाई थी। मनीषा, अवधेश और आशीष को हाईकोर्ट से जमानत मिल गई थी जबकि पीयूष, रेनू और सोनू जेल में ही बंद हैं।
 
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हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब अवधेश और आशीष को भी समर्पण कर जेल जाना होगा। न्यायमूर्ति अरविंद कुमार सांगवान और न्यायमूर्ति मो. अजहर हुसैन इदरीसी की दो सदस्यीय खंडपीठ ने 105 पेज के फैसले में सात अपीलों का निस्तारण कर दिया। इसमें दोषियों की छह अपील के साथ ज्योति के पिता शंकरलाल नागदेव की सेशन कोर्ट द्वारा दोषमुक्त करार दिए गए अभियुक्तों पीयूष की मां पूनम, भाई मुकेश व चचेरे भाई कमलेश को भी सजा सुनाने संबंधी अपील शामिल थी।
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