जुलाई 2014 से जेल में ही बंद हैं
वहीं बचाव पक्ष ने पीयूष, रेनू उर्फ अखिलेश कनौजिया व सोनू कश्यप को जमानत दिए जाने की पैरवी करते हुए तर्क रखा कि मुकदमे की सुनवाई के दौरान पीयूष को हाईकोर्ट से जमानत मिल गई थी लेकिन सजा के बाद उसे दोबारा जेल जाना पड़ा था हालांकि रेनू और सोनू घटना के बाद 31 जुलाई 2014 से जेल में ही बंद हैं। मामले में पीयूष पर मनीषा मखीजा, अवधेश चतुर्वेदी और आशीष कश्यप के साथ मिलकर षडय़ंत्र रचने का आरोप है।
रेनू और सोनू कांट्रैक्ट किलर हैं
मनीषा, अवधेश व आशीष को हाईकोर्ट से दो फरवरी 2023 को जमानत मिल चुकी है। हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति राहुल चतुर्वेदी व मो.अजहर हुसैन इदरीसी की दो सदस्यीय खंडपीठ ने याचिका की सुनवाई के दौरान माना कि पीयूष षड्यंत्र का मास्टरमाइंड है। रेनू और सोनू कांट्रैक्ट किलर हैं, जिन्होंने रुपयों के लिए हत्या जैसा गंभीर अपराध किया। दोनों ने जो अपराध किया है उसके लिए वह क्षमा के अधिकारी नहीं है। इसी सख्त टिप्पणी के साथ हाईकोर्ट ने तीनों को जमानत देने से इनकार कर दिया।
आठ साल चली कार्यवाही में छह को हुई थी उम्रकैद
मध्यप्रदेश के जबलपुर निवासी शंकरलाल नागदेव की बेटी ज्योति का विवाह 28 नवंबर 2012 को पांडु नगर निवासी बिस्कुट व्यापारी ओमप्रकाश श्यामदासानी के बेटे पीयूष से हुआ था। 27 जुलाई 2014 को संदिग्ध हालात में ज्योति की हत्या हो गई थी। ज्योति के पति ने रात लगभग 11:30 बजे स्वरूप नगर थाने जाकर लुटेरों द्वारा ज्योति का अपहरण करने की सूचना दी थी। देर रात लगभग एक बजे पनकी से ज्योति का क्षत-विक्षत शव बरामद हुआ था।
प्रेमजाल में फंसकर भाड़े के हत्यारों से कराई हत्या
पुलिस ने पूछताछ के बाद पीयूष को अपनी प्रेमिका मनीषा मनीखा के प्रेमजाल में फंसकर भाड़े के हत्यारों से ज्योति की हत्या करवाने के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। पुलिस ने पीयूष, उसकी प्रेमिका मनीषा मखीजा, मनीषा के ड्राइवर अवधेश कुमार चतुर्वेदी, पीयूष से सुपारी लेकर हत्या की साजिश रचने वाले आशीष कश्यप, सुपारी किलर रेनू उर्फ अखिलेश कनौजिया व सोनू कश्यप की चार्जशीट कोर्ट भेजी।
पीयूष के पिता ओमप्रकाश की हो गई थी मौत
वहीं, घटना की जानकारी होने के बावजूद पुलिस को सही जानकारी न देने के आरोप में पीयूष के पिता ओमप्रकाश, मां पूनम, भाई मुकेश व चचेरे भाई कमलेश के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट भेजी थी। अपर जिला जज प्रथम ने 21 अक्टूबर 2022 को पीयूष, मनीषा, अवधेश, आशीष, सोनू व रेनू को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। बाकी को बरी कर दिया था। मुकदमे की सुनवाई के दौरान पीयूष के पिता ओमप्रकाश की मौत हो गई थी।