कानपुर। 42 दिन बाद सराफा बाजार एक बार फिर गुलजार हो गया। बुधवार को तीन बजे से दुकानें खोलने का फरमान किसी ने नहीं माना। मंगलवार रात में ही कर्मचारियों को कह दिया गया था कि सुबह समय पर पहुंच जाएं। सफाई कर्मचारियों को भी एक घंटे पहले बुलाया गया था। हाल ये था कि बिरहाना रोड में कई शोरूम तो सुबह नौ बजे ही खुल गए। 10 बजे तक सभी शोरूम खुल चुके थे।
बिरहाना रोड जैसा ही हाल नयागंज, चौक और धोबी मोहाल सराफा बाजार का रहा। दुकानें खोलने के बाद सराफ दूसरे प्रदेशों का हाल जानने में लगे रहे। फोन, व्हाट्सएप और मैसेज भेजकर बाजार खुलने की बधाइयां दी गईं। प्रमुख बाजारों में स्थानीय कारीगरों ने सुबह से ही अपनी गद्दी संभाल ली। चौक सराफा के अध्यक्ष कैलाश अग्रवाल ने बताया कि बाहरी कारीगरों को रात में ही फोन से जानकारी दे दी गई है। वह एक दो दिन में फिर से शहर में काम करने आ जाएंगे।
शादी की खरीदारी चालू
बाजार खुलते ही खरीदार भी आने लगे। ज्यादातर लोग 12 बजे के बाद बाजार पहुंचे। इनमें वे लोग अधिक थे जिनके यहां 16 तारीख को शादी है। घाटमपुर से आए हेमंत मिश्रा ने बताया कि बहन की शादी के लिए कहीं जेवर नहीं मिल रहे थे। 16 को ही शादी है। बाजार खुलने की सूचना मिली तो सुबह ही आ गए।
लगा जाम, फंसी रहीं गाड़ियां
डेढ़ महीने तक जाम रहित रहा बिरहाना रोड, नयागंज, चौक बाजार बुधवार को फिर से जाम से जूझा। कारोबारियों और खरीदारों की भीड़ बढ़ने से वाहनों की रेलमपेल शुरू हो गई। सड़क के दोनों ओर कारों, बाइकों और ठेलों का बेतरतीब जमावड़ा लगा रहा।
मोची, रेहड़ी खोमचे वाले खुश
सराफा बाजार बंद रहने का असर दूसरे रोजगारों पर भी पड़ा था। बंदी में इन बाजारों से भीड़ गायब रहने का दंश चाय-समोसा, पान-सिगरेट, मोची, रेहड़ी और खोमचे वालों ने भी झेला। बुधवार को बाजार खुले तो सभी के चेहरे खिल उठे।