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Kanpur News: अब कार्टिलेज में लंबे समय तक रहेगी जोड़ों के दर्द की दवा

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कानपुर। ऑस्टियोआर्थराइटिस से जूझ रहे मरीजों के लिए आईआईटी कानपुर की शोध छात्रा सप्तमी चक्रवर्ती ने उम्मीद की नई राह दिखाई है। उन्होंने कार्टिलेज-बाइंडिंग ड्रग डिलीवरी सिस्टम विकसित किया है। इसकी मदद से दवा जोड़ के अंदर मौजूद कार्टिलेज में चिपककर लंबे समय तक वहीं रहती है। इससे मरीज को लंबे समय तक लाभ मिलता और बार-बार दवा देने की आवश्यकता कम हो जाती है।
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सप्तमी संस्थान के मेहता फैमिली सेंटर फॉर इंजीनियरिंग इन मेडिसिन में प्रोफेसर धीरेंद्र एस. कट्टी के निर्देशन में पीएचडी कर रही हैं। उनका शोध प्रारंभिक अवस्था के ऑस्टियोआर्थराइटिस की पहचान, बीमारी के नए जैविक लक्ष्यों की खोज और ऐसे बहु-लक्ष्यीय दवा उम्मीदवार विकसित करने पर आधारित है जो बीमारी की प्रगति को धीमा करने में मदद कर सकें। मौजूदा उपचार में दवा प्रभावित हिस्से में अधिक समय तक नहीं टिक पाती जिससे बार-बार उपचार की आवश्यकता पड़ती है।


सप्तमी की विकसित तकनीक को पेटेंट मिल चुका है और परियोजना को नेशनल रिसर्च फाउंडेशन की स्वीकृति भी मिली है। उन्होंने अपने शोध निष्कर्ष आईआईटी दिल्ली, एससीटीआईएमएसटी केरल और दक्षिण कोरिया के इंचियोन में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में प्रस्तुत किए। आईआईटी दिल्ली और एससीटीआईएमएसटी में उन्हें सर्वश्रेष्ठ पोस्टर पुरस्कार मिला।
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कोविड में रुका शोध, फिर भी नहीं मानी हार

2019 में पीएचडी शुरू करने के बाद कोविड के कारण उनका शोध प्रभावित हुआ। करीब एक साल तक प्रयोग सफल नहीं हुए और लगातार असफलताओं से मनोबल भी टूटा। इसके बावजूद उन्होंने प्रयास जारी रखे और यह तकनीक विकसित करने में सफलता हासिल की।
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