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Kanpur News: तीन केंद्रों पर हुई जेईई मेन की परीक्षा, 3128 पंजीकृत छात्रों में 258 रहे अनुपस्थित

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कानपुर। जेईई मेन-2026 के प्रथम सत्र की परीक्षा बुधवार से शुरू हो गई। शहर के तीन केंद्रों में आयोजित परीक्षा में अधिकांश छात्रों को गणित के सवाल कठिन लगे। दो पालियों सुबह 8:30 और दोपहर 2:30 बजे से हुई परीक्षा के लिए 3128 छात्र पंजीकृत थे, जिनमें से 258 ने परीक्षा छोड़ दी।
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जेईई एक्सपर्ट मनोज शर्मा ने बताया कि पेपर मध्यम स्तर का रहा, जिसमें गणित सबसे कठिन, रसायन विज्ञान आसान लेकिन थोड़ा ट्रिकी और भौतिकी संतुलित रही। जिन छात्रों ने अवधारणात्मक समझ, अभ्यास और समय प्रबंधन के साथ तैयारी की होगी उन्होंने बेहतर प्रदर्शन किया होगा। परिणामों के साथ ही कट-ऑफ में भी हल्का बदलाव देखने को मिल सकता है।

भौतिकी सेक्शन को अधिकांश छात्रों ने मध्यम स्तर का बताया। यह गणित की तुलना में अपेक्षाकृत सरल रहा और निर्धारित समय में हुआ। न्यूमेरिकल प्रश्न सीधे और फॉर्मूला आधारित थे, लेकिन प्रश्नों की लंबाई के कारण सावधानी जरूरी थी। मॉडर्न फिजिक्स और थर्मोडायनामिक्स से 2–3 प्रश्न पूछे गए, जिससे इन अध्यायों का वेटेज अधिक रहा। वहीं ऑप्टिक्स का वेटेज कम देखने को मिला, जहां कई छात्रों ने केवल एक ही प्रश्न हल किया। भौतिकी में गहरी समझ और सही कॉन्सेप्ट एप्लीकेशन करने वाले छात्रों को लाभ मिला।
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रसायन विज्ञान सेक्शन को छात्रों ने आसान और स्कोरिंग माना, हालांकि कुछ प्रश्न अवधारणात्मक रूप से थोड़े पेचीदा थे। प्रश्नों का वितरण संतुलित रहा, जिसमें इनऑर्गेनिक और फिजिकल केमिस्ट्री पर अधिक जोर दिया गया। इनऑर्गेनिक के महत्वपूर्ण टॉपिक्स में कोऑर्डिनेशन कंपाउंड्स, केमिकल बॉन्डिंग, पी-ब्लॉक एलिमेंट्स और पीरियोडिक प्रॉपर्टीज शामिल रहीं, जिनमें आयनीकरण ऊर्जा पर आधारित प्रश्न भी पूछे गए। ऑर्गेनिक केमिस्ट्री का वेटेज अपेक्षाकृत कम रहा, लगभग 3-4 प्रश्न ही पूछे गए। मैच-द-कॉलम या रीजन-बेस्ड प्रश्न नहीं आए। कम समय में हल हो जाने के कारण रसायन विज्ञान ने छात्रों के कुल स्कोर को मजबूती दी।

इस बार गणित को पेपर का सबसे कठिन सेक्शन माना गया। प्रश्न लंबे, बहु चरणीय और अत्यधिक समय लेने वाले थे। कैल्कुलस का वेटेज अपेक्षाकृत अधिक रहा, जबकि मैट्रिस और वेक्टर अलजेब्रा से दो-दो प्रश्न पूछे गए। कुछ प्रश्न इंटीजर टाइप और राउंडिंग ऑफ पर आधारित थे, जिससे गणना में अतिरिक्त समय लगा। प्रश्न हल तो किए जा सकते थे, लेकिन अंतिम उत्तर तक पहुंचने के लिए कई स्टेप्स जरूरी थे, जिससे समय प्रबंधन बड़ी चुनौती बना।
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