चित्रकूट। जिला जेल रगौली में ईद के दिन (14 मई) गैंगवार में दो कुख्यात अपराधियों मुकीम काला और मेराज अली की हत्या, फिर पुलिस मुठभेड़ में मारे गए कुख्यात अपराधी अंशू दीक्षित की मौत के बाद सुरक्षा पर उठ रहे सवालों के पांच दिन बाद व्यवस्था को चुस्त दुरुस्त करने की कवायद शुरू कर दी है। फिलहाल अब जेल की सुरक्षा के लिए एक प्लाटून पीएसी के जवानों (12) की तैनाती संग दो दरोगाओं और आठ सिपाहियों की और ड्यूटी लगाई गई है।
ईद के दिन जेल के अंदर खूनी खेल के बाद सबसे पहले सुरक्षा व्यवस्था पर ही सवाल उठे थे। माना गया था कि सुरक्षा व्यवस्था में खामी के चलते ही इतनी बड़ी घटना जेल के अंदर हो गई। फिलहाल इससे सबक लेते हुए अब जेल में एक प्लाटून पीएसी जवानों संग दो दरोगाओं और आठ सिपाहियों की भी तैनाती की गई है। बताया जाता है कि पीएसी अभी कुछ दिनों के लिए तैनात की गई है। जेल आने और बाहर जाने वालों पर ये जवान पैनी नजर रख रहे हैं। जेल के भीतर जाने वाली हर चीज की पहले बाहर बारीकी से जांच के बाद ही अंदर भेजा जा रहा है। जेल में तैनात हर कर्मचारी अपने पहले से काफी चौकन्ना नजर आने लगा है।
गैंगवार मामले के पांचवें दिन जेल परिसर में सुरक्षा को और सख्त करते हुए बंदियों पर नजर रखने को हाई सिक्योरिटी और आइसोलेट बैरक के पास चार और जवान दूसरी जेल से यहां पर तैनात किए गए हैं। गौरतलब हो कि 14 मई को रगौली जेल में कुख्यात अपराधी अंशू दीक्षित ने दो खूंखार अपराधियों मेराज अली और मुकीम काला की पिस्टल से गोली मारकर हत्या कर दी थी। इसके बाद पुलिस मुठभेड़ में वह खुद भी ढेर हो गया था। इसके बाद जेल की सुरक्षा व्यवस्था में छेद होने की चर्चाएं खूब हुईं। साथ ही जिला जेल की सख्त सुरक्षा व्यवस्था की पोल भी खुल गई थी। मामले में जेल अधीक्षक, जेलर, दो वार्डन व एक सिपाही को शासन ने निलंबित कर जांच के निर्देश दिए थे। मामले की दो टीमें जांच कर रही हैं।
शासन से मिले निर्देश के अनुसार सभी कमियों को चुस्त दुरुस्त किया जा रहा है। पूरे मामले की जांच बड़े अफसर कर रहे हैं। जेल परिसर में बैरक व मुख्य गेट के पास सुरक्षा व्यवस्था का दायरा बढ़ाने के लिए दो दरोगाओं और आठ सिपाहियों के अलावा एक प्लाटून पीएसी के जवानों को तैनात किया गया है।
-अशोक कुमार सागर, जेल अधीक्षक, चित्रकूट
चार जगह चेकिंग, 24 घंटे बाद पहुंचता सामान
जेल में बंद बंदियों से मिलने या बात करने आने वालों की कोरोना संक्रमण के चलते मुलाकात तो नहीं हो रही, लेकिन उनके लिए लाए जाने वाले सामान को पहुंचाने का काम जारी है। शुक्रवार की घटना के बाद ऐसी सामग्री को संबधित बंदी तक पहुंचाने के सिस्टम में भारी बदलाव हुआ है। अब यह सामग्री बंदी तक 24 घंटे बाद चार जगह जांच के बाद पहुंचती है। पहले यह सामग्री गेट और बैरक के पास के अलावा इलेक्ट्रानिक मशीन की जांच के बाद पहुंचती थी। अब सारी सामग्री जेल परिसर में अलग बंदी के नाम व बैरक की पर्ची लिखकर रखी जाती है। तीन स्थान पर सुरक्षाकर्मियों की जांच के बाद इलेक्ट्रानिक मशीन से जांच कराकर एक दिन बाद पहुंचाई जाती है। आपत्ति वाली सामग्री को तत्काल ही हटाया जाता है।
जेल अधीक्षक ने बैरकों की ली तलाशी
जिला जेल में गैंगवार व पुलिस मुठभेड़ के बाद हर जगह सतर्कता दिखाई देने लगी है। अब जेल के कई सिस्टम बदल गए हैं। मंगलवार को जेल अधीक्षक अशोक कुमार सागर ने बंदी रक्षकों संग जेल परिसर का निरीक्षण किया। कई बैरकों की तलाशी भी ली गई। सभी बैरक के बंदी जेल अधीक्षक व बंदी रक्षकों से शुक्रवार की घटना के बाद की जानकारी लेने को परेशान दिखा। सभी के चेहरे में भय दिख रहा था।
जेल पीसीओ के कई नियम भी बदले
जेल परिसर में स्थापित पीसीओ से बंदियों की परिजनों से बात होने पर सुकून महसूस करते थे, लेकिन अब पीसीओ में कई नियम बदल गए हैं। हरेक बंदी के हर डिटेल की रजिस्टर में एंट्री हो रही है। जो एक माह में अनियमित थी। पहले ड्यूटी पर मौजूद बंदी रक्षक बंदियों का रुतबा व चेहरे देखकर बर्ताव करता था। खूंखार अपराधियों के कई फोन व नाम की एंट्री रुपये लेकर नहीं की जाती थी। जेल परिसर में पीसीओ का संचालन तो जारी है, लेकिन अब हरेक फोन करने वालों की एंट्री हो रही है। कौन किससे बात करेगा और किस नंबर से फोन आया, सब एक रजिस्टर में नोट किया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, पीसीओ से मुकीम काला, मेराज अली व अंशू दीक्षित जब भी किसी से बात करते थे, तो उसकी एंट्री नहीं होती थी। बाहर से आने वाले फोन नंबर की जरूर एंट्री होती थी।
सर्वे टीम ने पांचवें दिन की सीसीटीवी की जांच
जिला जेल में खूनी खेल होने के पांच दिन बीतने के बाद खराब सीसीटीवी कैमरों को सही करने को कार्यदायी संस्था राजकीय निर्माण निगम लखनऊ के इंजीनियरों की चार सदस्यीय टीम मंगलवार को जेल पहुंची और फिलहाल कैमरों की जांच ही की, सही अभी नहीं किए हैं। जेल प्रबंधन की नई चिट्ठी के बाद जेल पहुंचे इंजीनियरों ने सीसीटीवी कैमरों को चेक किया, जिसमें बाहर क्षेत्र में लगे आठ कैमरे सही मिले। जेल में 32 सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं, जिसमें से 24 कैमरे करीब दो माह से खराब हैं, जबकि आठ कैमरे ही काम कर रहे हैं। गैंगवार और पुलिस मुठभेड़ की जांच कर रहे अफसरों को पता चला कि सीसीटीवी कैमरे खराब होने पर इनकी मरम्मत करने वाली संस्था को कई बार पत्राचार किया गया, लेकिन संस्था ने इन कैमरों को ठीक करने की जहमत नहीं उठाई थी। शासन स्तर से मामले का संज्ञान लेने के पांच दिन बाद इंजीनियर जेल पहुंचे। जेल अधीक्षक अशोक कुमार सागर ने बताया कि कंपनी के इंजीनियरों ने कैमरे चेक किए हैं। खराब कैमरों को जल्द सही करा दिया जाएगा। इंजीनियरों का भी कहना है कि सर्वे पूरा कर लिया गया है और जल्द कैमरों को सही करा दिया जाएगा।
टावरों में पुलिस कर्मियों की नहीं लगाई ड्यूटी
जिला जेल के अंदर व बाहर का नजारा देखने के लिए पांच टावर हैं, जिसमें पुलिस कर्मियों की ड्यूटी लगाई जाती रही है, लेकिन घटना होने के पहले से टावर में पुलिसकर्मियों की ड्यूटी हीं नहीं लगाई गई। पांचों टावर लगभग 100 मीटर की ऊंचाई में बने हुए है। इन टावरों के ऊपर दिन व रात पुलिस कर्मियों की ड्यूटी एक समय लगाई जाती रही है। अब इतनी बड़ी वारदात होने के बाद टावरों में सुरक्षा कर्मियों की ड्यूटी लगाने की तैयारी की जा रही है। मंगलवार को टावरों की सफाई कराई गई, ताकि पुलिस कर्मियों की ड्यूटी लगाई जा सके।
डीआईजी जेल ने निलंबित अफसरों से पूछताछ की
चित्रकूट। जिला जेल रगौली में हुए खूनी खेल की जांच मंगलवार को भी जारी रही। पुलिस की विशेष दो टीमें अपनी विवेचना में फोरेंसिक टीम संग बैरक और घटनास्थल पहुंची। डीआईजी जेल संजीव त्रिपाठी ने पूरे जेल का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं को देखा। इसके बाद निलंबित अधिकारी व वार्डन से पूछताछ की। इसके बाद हाईसिक्योरिटी व आइसोलेट बैरक के बंदियों से पिस्टल के बारे में जानकारी ली। बीते शुक्रवार (14 मई) को जिला जेल परिसर के हाईसिक्योरिटी बैरक व आइसोलेट बैरक के सामने बंदी शार्प शूटर अंशू दीक्षित उर्फ सुमित ने ताबड़तोड़ फायरिंग कर माफिया मुख्तार अंसारी के रिश्तेदार और जेल में बंद पश्चिम यूपी के अपराधी मेराज अली व मुकीम काला को मार डाला था। इसके बाद पुलिस मुठभेड़ में वह भी ढेर कर दिया गया था। मामले में शासन ने जेल अधीक्षक श्रीप्रकाश त्रिपाठी, जेलर महेंद्र पाल, दो वार्डन हरीशंकर और संजय खरे व पीएसी जवान अमित को निलंबित कर दिया था। मामले की जांच लगातार पांचवें दिन भी जारी रही। मंगलवार की सुबह लगभग दस बजे जांच अधिकारी डीआईजी जेल संजीव त्रिपाठी जेल पहुंचे और व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। उधर, कोतवाली में दर्ज दोनों एफआईआर की विवेचना करने पुलिस की टीम पहुंची और बंदियों से पूछताछ की। फोरेंसिक टीम ने भी बैरक और घटनास्थल का निरीक्षण किया।
पिस्टल की फोटो दिखा बंदियों से की पूछताछ
डीआईजी जेल संजीव त्रिपाठी ने दोनों खूंखार अपराधियों मुकीम काला और मेराज अली की हत्या में प्रयुक्त पिस्टल की फोटो लेकर बंदियों से भी पूछताछ की। कुछ बंदियों ने बताया कि पहले तो नहीं देखा था, पर 14 मई की सुबह सात बजे से ही अंशू की कमर में कुछ असलहा जैसा दबा होने का शक हुआ था। वह पिस्टल लेकर सुबह नित्यक्रिया के लिए निकला था और पूरे टाइम उसे कमर में जींस के पैंट में दबाए था। त्रिपाठी ने जेल के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरे के फुटेज के आधार पर आने जाने वालों लोगों के बारे में दो घंटे तक पूछताछ की। कई बार वार्डन व पीएसी जवान जांच के दौरान सवालों का सही जवाब नहीं दे पाए।
पिस्टल को लेकर उलझी पहेली
जेल में जिस 9 एमएम पिस्टल से खूनी खेला गया, उसे लेकर पूरा विभाग जांच में उलझा है। कुछ ने बताया कि यह इटली की है तो कुछ ने बताया कि आस्ट्रेलिया की, लेकिन अभी इसकी पुष्टि नहीं हो रही है। पिस्टल के बारे में बताया गया कि यह बिहार के मुंगेर क्षेत्र से आई है, तो जिला पुलिस टीम ने बिहार पुलिस से संपर्क साधा है। अभी इस बाबत पुलिस अधिकारी नहीं बोल रहे हैं।
पिस्टल की जांच चल रही है। कई जगह से जानकारी जुटाई जा रही है। प्रथम दृष्टया यह विदेशी पिस्टल है और आमतौर पर यह पिस्टल सामान्य लोगों के पास नहीं होती है। इस तरह की पिस्टल का प्रयोग कई कुख्यात अपराधियों ने किया है। सभी बिंदुओं पर जांच हो रही है।
-अंकित मित्तल, पुलिस अधीक्षक, चित्रकूट