प्रदूषण कम करने के लिए देशभर में सख्ती और कूड़ा जलाने पर रोक के बावजूद शनिवार को पनकी स्थित कूड़ा निस्तारण प्लांट में कूड़ा जलता रहा। इससे आसपास प्रदूषण बढ़ा। धुएं की वजह से आसपास स्थित पनकी भऊ सिंह और बदुआपुर में लोगों को सांस लेने में तकलीफ हुई।
कानपुरः प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार प्लांट में पीछे की तरफ स्थित बिजली बनाने वाले प्लांट के पास कूड़े के पहाड़ों में आग लगी है। प्लांट से बाईपास तक धुआं ही धुआं नजर आ रहा है। धुएं में मिश्रित जहरीली गैसों से आसपास के लोगों को सांस लेने में तकलीफ हो रही है। न दिन में चैन है न रात में सो पाते हैं। धुंध की वजह से बाईपास से निकलने में भी दिक्कत हो रही थी। पनकी भऊ सिंह नगर में 46 एकड़ जमीन पर कूड़ा निस्तारण प्लांट छह साल पहले शुरू हुआ था।
रोज औसतन 1000 मीट्रिक टन कूड़ा डाल रहा है नगर निगम
धुएं में घूमते मवेशी
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शुरुआत में एटूजेड कंपनी शहरभर में घरों से कूड़ा उठाकर इस प्लांट में ले जाती रही और इस प्लांट में कूड़े से जैविक खाद, इंटरलाकिंग टाइल्स, बिजली बनाती रही। कंपनी प्रबंधन की लापरवाही की वजह से बिजली बनाने वाला प्लांट तीन महीने में ही बंद हो गया। जबकि जैविक खाद की मांग असम तक से आती थी और मालगाड़ियों से माल भेजा जाता था। पर, घरों से अपेक्षित यूजर चार्ज न मिलने की वजह से धीरे - धीरे कंपनी ने काम घटाना शुरू कर दिया। अप्रैल 2015 में यह कंपनी प्लांट ठप कर भाग गई। तब से इस प्लांट में नगर निगम रोज औसतन 1000 मीट्रिक टन कूड़ा डाल रहा है।
इसके बाद कई कंपनियां इस प्लांट को चलाने के लिए आगे आईं। आईएलएफएस के नाम पर नगर निगम सदन ने मुहर भी लगाई, पर शासन की हीलाहवाली की वजह से इस कंपनी से बीती 24 दिसंबर को अनुबंध हो पाया। पर, तब तक प्लांट में लगभग पांच लाख मीट्रिक टन कूड़ा एकत्रित हो गया। कंपनी ने वहां काम तो शुरू किया, पर अभी तक इसे पूरी क्षमता से नहीं चला पाई है। इस वजह से प्लांट में कूड़े के पहाड़ ऊंचे होते जा रहे हैं। हालत यह है कि प्लांट में आए दिन आग लगती रहती है।
कूड़ा जलने से धुएं के साथ जहरीली गैसें निकलती हैं
बीमारियों को दावत देने वाला धुंआ
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जीएसवीएम मेडिकल कालेज के मेडिसिन विभाग के डॉ. विशाल गुप्ता के अनुसार कूड़ा जलने से धुएं के साथ जहरीली गैसें निकलती हैं। ये स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होती हैं। इससे दमा सहित कई तरह की बीमारियां हो सकती हैं।
लंबे समय से एकत्रित कूड़े में मीथेन गैस बनती है। इसी गैस की वजह से कूड़े में आग लगती है। प्लांट में चारों तरफ सबमर्सिबल लगे हैं। इनसे आग बुझाई जाती है। प्लांट में दो बैलिस्टिक (कूड़ा प्रोसेस करते हुए गीला एवं सूखा कूड़ा अलग - अलग करने वाली मशीनें लगी हैं। तीसरी मशीन दिल्ली से चल चुकी है। 19 नवंबर तक आ जाएगी। इससे नियमित रूप से पहुंच रहा पूरा कूड़ा निस्तारित होने लगेगा। साथ ही पुराने कूड़े के निस्तारण में भी तेजी आएगी।
अविनाश सिंह, नगर आयुक्त