सप्लाई चेन पर पड़ सकता है प्रभाव
बीमा कंपनियों ने 30 प्रतिशत तक प्रीमियम बढ़ा दिया है। इससे माल की लागत 30 प्रतिशत खुद ही बढ़ गई है। लाल सागर और स्वेज नहर के माध्यम से महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग के साथ अब एक उच्च जोखिम वाला क्षेत्र माना जाता है। प्रमुख शिपिंग लाइनें केप ऑफ गुड होप के आसपास जहाजों को फिर से शुरू कर देंगी, जिससे अनुमानित समय 14 से 20 दिन बढ़ जाएगा। इससे लॉजिस्टिक कॉस्ट और बढ़ने की संभावना है। निर्यातक वेट एंड वाच की स्थिति में हैं। युद्ध आगे और बढ़ा तो निर्यात उत्पादों की सप्लाई चेन पर प्रभाव पड़ सकता है।
ईरान में हवाई क्षेत्र बंद होने से बढ़ी समस्या
फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट आर्गनाइजेशन फियो के संयोजक आलोक श्रीवास्तव ने बताया कि ईरान और आसपास के क्षेत्रों में हवाई क्षेत्र के बंद होने से एयरलाइन को यूरोप और अन्य पश्चिमी बाजारों में कार्गो शिपमेंट के लिए लंबे, अधिक महंगे मार्गों को अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इसके चलते हवाई और शिपिंग माल भाड़े में वृद्धि हो गई है। उन्होंने बताया कि तनाव का असर मिडिल ईस्ट के देशों तक ही सीमित है। अमेरिका, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीकी देशों में निर्यात किया जा रहा है।