कानपुर। बदलती जीवनशैली और गलत खानपान के कारण मोटापा तथा बड़ी आंत के कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। पिछले 10 वर्षों में ऐसे मामलों में 50 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है। यह जानकारी दिल्ली से आए कोलोरेक्ट कैंसर विशेषज्ञ विवेक मंगल ने शुक्रवार को आईएमए भवन में आयोजित सीजीपी के 43वें वार्षिक रिफ्रेशर कोर्स में दी।
कार्यक्रम की शुरुआत अध्यक्ष डॉ. अनुराग मेहरोत्रा, सचिव डॉ. शालिनी मोहन, सीजीपी सचिव डॉ. शरद दमेले ने दीप प्रज्वलित कर दी। डॉ. मंगल ने बताया कि लोग बड़ी आंत के कैंसर के लक्षणों को अक्सर पाइल्स समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। मोशन में खून का मिलना या खून के थक्के गिरना कैंसर का लक्षण हो सकता है। कोलोनोस्कोपी जांच से इसका पता चलता है। मुंबई से आईं शिखा अग्रवाल ने बच्चों में गंभीर रूमेटोलॉजिकल रोगों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि बार-बार वायरल, बुखार और जोड़ों में दर्द सामान्य नहीं है। यह आर्थराइटिस या अन्य गंभीर विकार हो सकता है। नई दिल्ली से डॉ. हीरक पहाड़ी ने लिवर ट्रांसप्लांट, लखनऊ से आए ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. चिरायता बसु ने साइनाइटिस जैसे रोगों और मुरादाबाद से आए डॉ. राजू रस्तोगी ने एआई पर चर्चा की।
बिना चीरफाड़ ब्रेन सर्जरी
लखनऊ से आए देवांश मिश्रा ने न्यूरो इंटरवेंशन तकनीक पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि अब मस्तिष्क की जटिल सर्जरी बिना खोपड़ी को खोले संभव है। इस तकनीक में पैर या हाथ की नस से सूक्ष्म तार डालकर दिमाग की नसों तक पहुंचाते हैं। यह बंद नसों को खोलकर रक्तसंचार बहाल करता है। इससे ब्रेन स्ट्रोक और हैमरेज का इलाज होता है और रोगी 48 घंटे में डिस्चार्ज हो जाता है।