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अंतराष्ट्रीय चाय दिवस: चलो एक चाय हो जाए से...2.40 करोड़ कप चाय शहरी पी रहे रोज, रोजाना 30 हजार किलो की खपत

Thu, 22 May 2025 01:02 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: हर रोज एक लाख किलो चायपत्ती की आपूर्ति कानपुर से ही हो रही है। इसमें 80 फीसदी चाय असम से और बाकी 20 फीसदी पश्चिम बंगाल और दक्षिण भारत से आती है। चाय बनाने वाले शेफ व दुकानदारों के अनुसार एक किलो चायपत्ती में 50 एमएल के औसत 800 कप बनते हैं।
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चाय - फोटो : Adobe stock
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विस्तार
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एक चाय की चुस्की एक कहकहा, अपना तो इतना सामान ही रहा... किसी कवि की यह पंक्तियां बतोलेबाज और जिंदादिलों के शहर कानपुर पर सटीक बैठती हैं। यहां मौसम और अवसर कोई भी हो बातें चाय की चुस्कियों के साथ चलती हैं। इनका चस्का भी शहरवासियों पर इस कदर हावी है कि एक दिन में दो करोड़ 40 लाख कप तक चाय पी जा रहे हैं। कानपुर चाय व्यापार मंडल के अध्यक्ष श्याम अग्रहरि के अनुसार संगठन में 84 व्यापारी सदस्य हैं। शहर में हर रोज औसत तीस हजार किलो पत्ती की खपत होती है।

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इसमें 50 प्रतिशत तक दो सौ रुपये किलो वाली चायपत्ती बिकती है। इसे अधिकतर चाय बेचने वाले होटल, रेस्टोरेंट, दुकानदार खरीदते हैं, यह रोजाना तीस लाख रुपये की बिकती है। दूसरी चाय की पत्ती की कीमत साढ़े तीन सौ रुपये प्रति किलो है और यह करीब 35 फीसदी तक बिकती है। इसे अधिकतर घरेलू लोग खरीदते हैं। शहर में इसकी बिक्री 36.75 लाख रुपये है। तीसरी उच्च गुणवत्ता वाली चायपत्ती की कीमत 500 रुपये प्रति किलो है। इसकी बिक्री 15 फीसदी है। इसमें ग्रीन टी, ऑर्थोडॉक्स लीफ, दार्जिलिंग टी आदि आते हैं। ये बड़े रेस्टोरेंट व होटल के लिए खरीदी जाती है।

हर रोज एक लाख किलो चायपत्ती की आपूर्ति
इसका कारोबार हर रोज 22.50 लाख रुपये का है। इस हिसाब से हर रोज शहर में 89.25 लाख रुपये की चायपत्ती बिक जाती है। उन्होंने बताया कि शहर से पूरे प्रदेश में भी चायपत्ती की आपूर्ति होती है। इस हिसाब से हर रोज एक लाख किलो चायपत्ती की आपूर्ति कानपुर से ही हो रही है। इसमें 80 फीसदी चाय असम से और बाकी 20 फीसदी पश्चिम बंगाल और दक्षिण भारत से आती है। चाय बनाने वाले शेफ व दुकानदारों के अनुसार एक किलो चायपत्ती में 50 एमएल के औसत 800 कप बनते हैं। इस हिसाब से तीस हजार किलो चायपत्ती में दो करोड़ 40 लाख कप चाय बनती है।

खूब भा रही है फ्लेवर चाय
युवाओं को फ्लेवर चाय खूब भा रही है। इसमें अदरक, इलायची, लौंग, लेमन, हनी लेमन, चॉकलेट, गुलाब, पान, मिंट, दालचीनी, तुलसी, स्ट्रॉबेरी, नारंगी, मैंगो, तरबूज और मसाला चाय भी खाफी पसंद की जा रही है। स्वरूपनगर, आर्यनगर, सिविल लाइंस, माल रोड, किदवईनगर, साकेतनगर, गोविंदनगर, फजलगंज, लाजपतनगर, कल्याणपुर आदि जगहों पर फ्लेवर चाय बनाने वाली कई दुकानें हैं। इसमें फर्नीचर से लेकर लाइट और म्यूजिक सभी कुछ युवाओं के अनुसार ही गया है। एक चाय के कप की कीमत 25 से लेकर 50 रुपये तक है।
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  • पहले युवा कॉफी पीना पसंद करते थे। अब फ्लेवर चाय की मांग बढ़ी है। इस बार नए फ्लेवर मैंगो और तरबूज भी पसंद किए जा रहे हैं। -सात्विक गुप्ता, कैफे ओनर
  • कैफे में आने वाले ज्यादातर युवा ही होते हैं, चाय के प्रति इनकी दीवानगी इतनी है कि, 40 डिग्री सेल्सियस में भी लोग इसे पीना पसंद कर रहे हैं।  -वैशाली, कैफे ओनर
  • रोज तीस हजार किलो चाय की खपत होती है। इसमें सभी वैरायटी शामिल हैं। मौसम बदलने पर खपत थोड़ी-बहुत कम ज्यादा होती है।  -श्याम अग्रहरि, अध्यक्ष कानपुर चाय व्यापार मंडल
  • शहर में 80 फीसदी असम की चाय पसंद की जाती है। बाकी पश्चिम बंगाल और दक्षिण भारत से आती है। आसपास के जिलों में भी चाय भेजी जाती है।  -सतीश बंसल, चाय व्यापारी
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