मायके का दखल बिगाड़ रहा पति-पत्नी के रिश्ते
घरेलू हिंसा के मुकदमों में सुलह-समझौते के प्रयास में झगड़ों के छोटे-छोटे कारण सामने आ रहे हैं। मायके वाले अपनी बेटी के लगातार संपर्क में रहते हैं। दिनभर बेटी का फोन मायके वालों की कॉल से घनघनाता रहता है। सह परवीक्षा अधिकारी रागिनी पांडेय ने बताया कि मायके वाले बेटी से ससुराल की छोटी-छोटी बातों पर डिसकस करते रहते हैं।
सलाह देते रहते हैं कि ये करो, ऐसे मत दबना, अपना अधिकार बनाए रखना। वहां घूमने चली जाओ, ये सामान खरीद लो। यही सब डिमांड नव विवाहिताएं अपने पति और ससुरालियों से करने लगती हैं। हर पति का आय के हिसाब से ही बजट होता है। अनाप-शनाप डिमांड से घर का बजट बिगड़ता है और लड़ाई-झगड़े शुरू हो जाते हैं। घरेलू हिंसा के मुकदमे से शुरू हुई बात तलाक तक पहुंचने लगती है।
जवाहर नगर निवासी एक युवती की शादी सात माह पहले नवाबगंज में युवक से हुई थी। कुछ माह में ही दोनों के बीच का झगड़ा कोर्ट पहुंच गया। घरेलू हिंसा का मुकदमा दाखिल हुआ तो कोर्ट ने काउंसलिंग कर समझौते के लिए जिला प्रोबेशन दफ्तर भेज दिया। काउंसलिंग में खुलासा हुआ कि युवती के मायके वाले दिन में कई-कई बार फोन कर ससुराल में चल रही बातें पूछते रहते थे। युवती ने सीसामऊ से शॉपिंग की तैयारी के बारे में बताया तो मायके से गुमटी या नवीन मार्केट जाने की सलाह दी गई। युवती ने गुमटी या नवीन मार्केट से शॉपिंग की जिद की तो पति से जमकर झगड़ा हुआ। फिर दोनों में झगड़ा आम बात हो गया।
किदवई नगर की एक युवती का विवाह एक साल पहले चकेरी में युवक से हुआ था। दोनों के बीच घरेलू हिंसा का मुकदमा चल रहा है। युवती ने पति पर मारपीट समेत कई गंभीर आरोप लगाए हैं। दोनों को काउंसलिंग के लिए प्रोबेशन दफ्तर बुलाया गया। बातचीत चालू की गई तो खुलासा हुआ कि मायके वालों का हस्तक्षेप बहुत होने के कारण झगड़े हुए। दिन में पांच-सात बार तक फोन किए गए। मायके से पूछा जाता कि क्या कर रही हो तो जवाब मिलता फलां काम। इस पर युवती से कहा जाता कि कामवाली क्यों नहीं लगवाई है। धीरे-धीरे युवती ने कामवाली लगवाने की जिद कर काम करने छोड़ दिए तो झगड़े होने लगे।