फुटवियर में चीन की धमक हो रही कम
कोरोना के बाद फुटवियर उद्योग में चीन का दबदबा कम हो गया है। अब घरेलू उत्पाद गुणवत्ता और कीमत के लिहाज से चीन जितने ही प्रतिस्पर्धी हो गए हैं। चीन से कारोबार कानपुर समेत पूरे भारत, वियतनाम, इंडोनेशिया व बांग्लादेश में शिफ्ट हुआ है।
प्रदर्शनी में मशीनों-उत्पादों की मिलेगी जानकारी
इंडियन फुटवियर कंपोनेंट्स मैन्यूफैक्चर्स एसोसिएशन की ओर से उन्नाव के केएलसी में 6-7 दिसंबर को प्रदर्शनी लगेगी। इसमें जूते के सोल व अन्य उपकरणों का प्रदर्शन होगा। यहां 100 स्टाॅल लगेंगे। इसमें कानपुर के कारोबारी 15 स्टॉल लगाएंगे।
बीते सालों में निर्यात
- 2021-22 में पांच हजार करोड़
- 2022-23 में छह हजार करोड़
बीते सालों में घरेलू कारोबार
- 2021-22 में 1500 करोड़
- 2022-23 में 2000 हजार करोड़
कानपुर समेत देशभर में प्रति व्यक्ति औसत फुटवियर का उपयोग बढ़ा है। पहले यह एक से डेढ़ जोड़ी था जो अब ढाई जोड़ी हो गया है। यह बढ़ते फुटवियर उद्योग को दर्शा रहा है। -एसके वर्मा, एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर, इंडियन फुटवियर कंपोनेंट्स मैन्यूफैक्चर्स एसोसिएशन
प्रति व्यक्ति जूते की मांग बढ़ गई है। गुणवत्तायुक्त उत्पादों पर खास जोर दिया जा रहा है। यह पूरे फुटवियर उद्योग के लिए अच्छा मौका है। दो दिन की प्रदर्शनी में नई तकनीक का प्रदर्शन भी होगा। -राजेंद्र कुमार जालान, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, चर्म निर्यात परिषद
शहरी क्षेत्रों में फुटवियर की मांग तेजी से बढ़ी है। हालांकि लोगों की क्रय शक्ति अभी भी सीमित है। क्रय शक्ति बढ़ जाए, तो फुटवियर उद्योग में और तेजी देखने को मिल सकती है। -आलोक अग्रवाल, राष्ट्रीय महामंत्री आईआईए और फुटवियर कारोबारी