अंदर से कुछ ऐसी दिखती है महाराजा एक्सप्रेस
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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद 27 जून को द रॉयल प्रेसिडेंशियल सैलून (ट्रेन) से कानपुर सेंट्रल से लखनऊ के लिए रवाना हुए। इस दौरान उनके साथ मंत्री सतीश महाना भी महाराजा एक्सप्रेस से उनके साथ लखनऊ गए हैं। ऐसे में हम आपको पहली बार उस खास ट्रेन के अंदर का नजारा दिखाते है जो शाही एहसास कराती है।
पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने 2004 में इस ट्रेन से चंडीगढ़ से नई दिल्ली का सफर किया था। इसके बाद पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने भी इस ट्रेन से यात्रा करने की इच्छा जताई थी लेकिन कार्यक्रम तय नहीं हो सका था। पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने इस ट्रेन का इस्तेमाल नहीं किया।
अब रामनाथ कोविंद इस राजशाही एहसास दिलाने वाली ट्रेन से कानपुर दौरे पर आए थे। जिसका कानपुर सेंट्रल गवाह बना। पहली बार यह ट्रेन छह अधिक कोच की बनी है। अभी तक यह दो कोच की ट्रेन ही होती थी। बता दें कि अलग-अलग राष्ट्रपतियों को इस ट्रेन ने 87 बार सफर कराया है।
राजशाही ठाठ बाट का एहसास कराती है ट्रेन
ट्रेन के कोच एलएचबी (लिंग हॉफमैन बुश) तकनीकी पर आधारित मजबूत कोच होते हैं। किसी फाइव स्टार होटल के कमरों जैसा इसे सजाया गया है, जिसमें बैठने वाले को राजशाही जैसा एहसास होता है। इसमें जीपीएस और जीपीआरएस, सैटेलाइट एंटिना, टेलीफोन एक्सचेंज, मॉड्यूलर किचन, एक कोच से दूसरे कोच में संबंधित को निर्देश देने के लिए पब्लिक एड्रेस सिस्टम होता है और इसकी खिड़कियां बुलेटप्रूफ होती हैं। इस ट्रेन को 1956 में राष्ट्रपति के लिए बनाया गया था, तब यह दो कोच का सैलून होता था।