जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में शनिवार को एक साथ तीन बैच के डॉक्टरों का मिलन हुआ। मेडिकल कॉलेज के पूर्व स्टूडेंटों के संगठन जेम्स की ओर से आयोजित 31वें जेम्सकॉन में डायमंड व गोल्डन बैच (1960 व 1965) के स्टूडेंट और 1985 के सिल्वर बैच के स्टूडेंटों ने शिरकत की। उनके साथ पहुंचे परिवार वालों ने भी जमकर मस्ती की।
इस मौके पर नई दिल्ली की डॉ. मनीषा पांडेय ने कहा कि बच्चेदानी के कैंसर के बढ़ते मामले चिंता का विषय है। यदि 10 से 13 साल की आयु में बच्चियों को इंजेक्शन लग जाएं तो बच्चेदानी के कैंसर में 70 फीसदी तक कमी आ सकती है। विदेशों में यह इंजेक्शन लगाए जा रहे हैं। जेम्स की ओर से भारत सरकार को इसके लिए पत्र लिखा जाएगा।
पत्नियों ने खेली अंत्याक्षरी
गणेशियंस स्क्वायर में डॉ. एसके कटियार की पत्नी सुमन कटियार ने 1965 बैच के डॉक्टरों की पत्नियों के बीच अंत्याक्षरी, नंबर मिलाओ आदि प्रतियोगिता कराईं।
अंत्याक्षरी में एक से बढ़कर एक फिल्मी गाने पेश हुए। डॉ. जेएन द्विवेदी की पत्नी रीता द्विवेदी, डॉ. आरपीएस भारद्वाज की पत्नी शशि और डॉ. राकेश चंद्रा की पत्नी मंजुला चंद्रा ने संयोजन किया।
कंधे का भी हो रहा है रिप्लेसमेंट
लंदन से आए डॉ. रवि त्रेहन ने कहा कि अब कंधे का भी रिप्लेसमेंट संभव हो गया है। घुटने के रिप्लेसमेंट में रोबोटिक सर्जरी काफी लोकप्रिय हो रही है। डॉ. त्रेहन ने कहा कि अच्छा खानपान, व्यायाम हड्डियों को मजबूत रखता है।
प्री बायोटिक, प्रो बायोटिक जरूरी
अमेरिका से आए डॉ. वीरेंद्र तिवारी ने कहा कि कुछ बैक्टीरिया शरीर के लिए लाभदायक होते हैं। कई बीमारियों में प्री बायोटिक व प्रो बायोटिक दवाएं अच्छा फायदा कर रही हैं। पेट, मोटापा, लीवर, हार्ट के मरीजों पर इन दवाओं का अच्छा असर दिख रहा है।
खांसी के साथ ब्लड आए तो कराएं जांच
अपोलो अस्पताल विशाखापट्टनम के डॉ. सुधीर चंद्र सिन्हा ने कहा कि खांसी-जुकाम के साथ ब्लड आने की समस्या हार्ट से जुड़ी हो सकती है। इसके लिए इंजियोग्राम किया जाता है। दिल में छेद का इलाज अब बिना ऑपरेशन आसानी से होता है।
‘सिर्फ कमाई नहीं, थोड़ी सेवा भी करे डॉ. साब’
कानपुर। महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा (डीजीएमई) डॉ. वीएन त्रिपाठी ने कहा कि पहले चिकित्सा का कार्य सेवा व धर्म था। बाद में यह व्यापार हुआ और अब उद्योग बन गया है। और-और के पीछे भागकर डॉक्टर सेवा को भूल रहे हैं।
हिपोक्रेटिक ओथ (इंटर्नशिप पूरी होने पर डॉक्टरों को दिलाई जाने वाली शपथ) की एक प्रति डॉक्टर अपने क्लीनिक-नर्सिंग होम में लगाएं। मरीज के प्रति संवेदनशील बनें, उनका आदर करें और धैर्य से इलाज करें। सिर्फ पैसा कमाना ही उद्देश्य न बनाएं।
डॉ. त्रिपाठी शनिवार को जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में हो रहे जेम्सकॉन के उद्घाटन सत्र को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत करने के लिए सपा सरकार कटिबद्ध है। तीन साल के भीतर प्रदेश के हर कोने में मेडिकल कॉलेज खुल जाएंगे।
कहा कि जीएसवीएम कालेज के लिए तकरीबन 300 करोड़ का प्रस्ताव मिला है। शासन में इस पर गंभीरता से मंथन चल रहा है। सीएसजेएम यूनिवर्सिटी के वीसी प्रो. जेवी वैशंपायन ने कहा कि मेडिकल क्षेत्र की चुनौतियों से निपटना होगा।
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल प्रो. नवनीत कुमार ने कॉलेज की उपलब्धियां गिनाईं और कहा कि कॉलेज को यूनिवर्सिटी बनाने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा जा चुका है।
आयोजक डॉ. एसके कटियार, डॉ. राकेश चंद्रा, डॉ. एके वर्मन, डॉ. अंबरीश गुप्ता, डॉ. उमेश पालीवाल आदि ने भी अपने विचार रखे। डॉ. सीमा उपाध्याय द्विवेदी ने शिव स्तुति प्रस्तुति दी।
सक्षम समेत 104 का सम्मान
जेम्सकॉन में जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में लगातार दो साल से अपने क्लास को टॉप कर रहे सक्षम पांडेय को गोल्ड मेडल के साथ ही 104 पूर्व टीचरों और मेधावियों को सम्मानित किया गया। सौरभ कुमार, कीर्ति सितानी, कुलसुम के साथ ही डॉ. सुरेश चंद्रा आदि को सम्मानित किया गया।