यातायात व्यवस्था की कमान भगवान भरोसे छोड़कर ट्रैफिक और पुलिस के अफसरान सैफई महोत्सव में नाच-गाना देखने और सलामी बजाने चले गए। शहर घंटों जाम की गिरफ्त में रहा।
चौराहों पर ट्रैफिक पुलिस नहीं थी। जाम में फंसी पब्लिक दांत पीसती रही और कोसती रही उन नकारा अफसरों को जो ढाई महीने से शहर में विकराल होती जा रही जाम की समस्या का हल नहीं निकाल पाए। कोई ड्यूटी पर लेट पहुंचा, किसी की ट्रेन छूटी तो किसी की परीक्षा।
इससे पहले भी इटावा में सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह के जन्मदिन और पंचायत चुनाव के दौरान शहर को जाम के हवाले कर दिया गया था। अफसर बहाने बनाते रहे थे और जाम लगता रहा था।
शनिवार को उत्तर और दक्षिण क्षेत्र के बीच आवाजाही बुरी तरह प्रभावित रही। फजलगंज फायर स्टेशन के पास खुदाई के कारण एक तरफ का रास्ता बंद कर दिया गया था। दूसरी तरफ से ही वाहनों की आवाजाही के कारण जाम लगना शुरू हो गया। सुबह के दस बजते ही सिंगल रूट पर ट्रैफिक का लोड इतना बढ़ गया कि विजय नगर चौराहा और सीटीआई भीषण जाम की गिरफ्त में आ गए।
ट्रैफिक पुलिस के मौजूद नहीं रहने के कारण करीब दो घंटे तक वाहन रेंगते रहे। असहाय पब्लिक अफसरों को कोसती रही। इधर जरीब चौकी, घंटाघर, परेड, मूलगंज, कल्यानपुर चौराहा पर सुबह से शाम तक कई बार जाम लगा। उधर रामादेवी से जाजमऊ की खस्ताहाल सर्विस लेन पर दोपहर 12:30 बजे के करीब सौ से अधिक वाहन जाम में फंसे थे। इसी बीच दिनेश यादव ने अपनी बाइक खड़ी करके मोर्चा संभाला।