पुलिस की सक्रियता से बच जाती जान
तभी रोहित उर्फ टोटा ने तमंचा सत्यम के सिर पर सटाकर गोली मार दी। इसके बाद फिर से कुछ लोगों ने थाने में जाकर किशोर को गोली मारने की सूचना दी, तब कुछ पुलिस कर्मी पहुंचे और आलाधिकारियों को घटना की जानकारी दी। वहीं, लोगों का कहना था कि अगर पुलिस समय से आती, तो जान बचाई जा सकती थी।
गिर गए शटर, भाग खड़े हुए ठेले वाले
गोली की आवाज सुनते ही पूरे बाजार में हल्ला मच गया। लोगों ने दुकानों के शटर गिराने शुरू कर दिए। सब्जी मंडी में खड़े ठेले वाले भी गोली चलने की आवाज सुनते ही भाग खड़े हुए। हत्यारोपियों के भागने के बाद घटना स्थलपर फिर से लोगों की भीड़ जुट गई। माहौल खराब न हो इसलिए पुलिस ने भीड़ को चलता किया।
गुजरते रहे राहगीर, नहीं उठाई विरोध की जहमत
दो गुटों के मारपीट के वक्त आसपास से राहगीरों के गुजरने का सिलसिला जारी था, लेकिन किसी ने भी युवकों को मारपीट करने से रोकने की जहमत नहीं उठाई। लोगों ने बताया अगर लोग मिलकर उनका विरोध करते, तो घटना को टाला जा सकता था। लोगों ने विरोध नहीं किया, जिसके चलते सोने ने सत्यम की सरेशाम हत्या कर दी।
पहचान छिपाने के लिए सभी ने छिपा रखे थे चेहरे
वारदात के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने चौराहे पर लगे पांच कैमरों के फुटेज चेक किए, जिसमें दोनों गुटों के युवक नजर आए। पहले आपस में बहस हुई और इसके बाद मारपीट होने लगी। अधिकांश युवकों ने चेहरे गमछे या मास्क से छिपा रखे थे। वहीं, एक अन्य कैमरे के रात 8:22 बजे के एक फुटेज में तीन नकाबपोश भी भागते नजर आए हैं।
वर्चस्व, लेनदेन या आशनाई के बिंदु पर जांच
देर रात तक पुलिस हत्या की वजह स्पष्ट नहीं कर सकी थी। वहीं, सत्यम की हत्या के पीछे वर्चस्व, रुपयों के लेनदेन या आशनाई में से कोई एक वजह होने की चर्चा रही। हालांकि, पुलिस तीनों एंगल पर ही मामले की जांच कर रही है। सूत्रों के अनुसार दोनों गुट के बीच सट्टा, जुआ खिलवाने को लेकर विवाद होता रहता है।