कानपुर देहात। आटा, तेल, चीनी और चावल के दाम अचानक बढ़ गए हैं। इससे रसोई का बजट बिगड़ गया है। उत्पादन में कमी, कम बारिश और त्योहारी मांग के चलते चीनी 45 से बढ़कर 50 रुपये किलो हो गई है। इसी तरह आटा दो और चावल पांच रुपये किलो मंहगा हो गया है जबकि सरसों का तेल 20 रुपये मंहगा होकर 170 से बढ़कर 190 रुपये पहुंच गया है।
जानकारों का कहना है कि चीनी के दाम चार दिन में बढ़े हैं। चीनी के बढ़ते दाम काबू में रखने के लिए सरकार ने चीनी के निर्यात में रोक के साथ स्टॉक लिमिट भी लागू कर दी है। स्टेट बैंक रोड स्थित किराना के थोक कारोबारी दिलीप ओमर ने बताया कि त्योहार आने वाले हैं। माल भाड़ा पहले ही महंगा हो चुका है। पैकिंग के दाम में हर दिन बढ़ोतरी हो रही है। देश में गन्ना उत्पादन में कमी, कम बारिश के चलते चीनी की फुटकर कीमतें बढ़कर 48 से 50 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई हैं। कुछ जगहों पर चीनी 51 रुपये किलो बिक रही है। नए चीनी सीजन की शुरुआत तक कीमतों में तेजी बनी रह सकती है।
माती रोड पर किराना के फुटकर विक्रेता राकेश प्रजापति ने बताया कि फुटकर में आटा 28 रुपये किलो से बढ़कर 30-31 रुपये किलो पहुंच गया है। सरसों का तेल पहले 170 रुपये किलो था जो बढ़कर 190 रुपये किलो हो गया है। इसी तरह चावल 50 रुपये किलो था वह अब 55 रुपये किलो बिक रहा है। वहीं, महीन चावल की बात करें तो उसके फुटकर रेट 70 किलो तक हैं। व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष महेश चंद्र अग्रवाल ने बताया कि गेहूं के दाम बढ़ गए हैं। गेहूं का भाव प्रति क्विंटल 2600-2670 रुपये हो गया है। पहले भाव 2500 रुपये प्रति क्विंटल था। आटा मिलों में गेहूं की मांग बढ़ रही है। आगे त्योहार हैं। ऐसे में मैदा आदि की मांग है। इसलिए मिल संचालक तेजी से गेहूं की खरीद कर रहे हैं। बरसात के चलते भी आपूर्ति प्रभावित हो गई है। इसका असर भी भावों पर दिख रहा है।
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चीनी स्टॉक लिमिट का भी असर
चीनी की कीमतों को काबू में रखने के लिए स्टॉक लिमिट लागू की गई है। सरकार के आदेश के मुताबिक अब कोई भी चीनी डीलर किसी भी स्टॉक को 30 दिन से ज्यादा समय तक अपने पास नहीं रख सकेगा। साथ ही अब एक समय पर किसी भी जगह 4,000 क्विंटल से ज्यादा चीनी का स्टॉक रखने की भी अनुमति नहीं है। तय सीमा से ज्यादा स्टॉक जमा करने पर कार्रवाई की जाएगी। यह आदेश एक अगस्त 2026 से लागू हो गया है और 30 नवंबर 2026 तक प्रभावी रहेगा।