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Kanpur News: दो साल में पनीर के लिए गए 47 नमूनों में 31 हो गए फेल

Sat, 08 Aug 2026 12:35 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
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कानपुर देहात। घरों में भोजन की थाली में पनीर का प्रयोग बढ़ गया है। इसका फायदा उठाते हुए कारोबारी मिलावट कर रहे हैं। मिलावटी पनीर लोगों की सेहत बिगाड़ सकता है। दो साल में पनीर के कुल 47 नमूने लिए गए। जांच में 31 नमूने फेल हो गए।
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जनपद में मिठाई व डेयरी उत्पाद ब्रिकी की करीब पांच हजार दुकानें हैं। लगभग हर दुकान में पनीर उपलब्ध है। 280 रुपये से लेकर 320 रुपये प्रति किलो में पनीर बिक रहा है। डेयरी पर बिकने वाला पनीर शुद्ध है यह कहना मुश्किल है। दरअसल महाराष्ट्र में एनालॉग पनीर जो कतई डेयरी उत्पाद नहीं है और वनस्पति तेल (जैसे पाम ऑयल), प्रोटीन और अन्य रसायनों से बनाया जाता है।
इस तरह का पनीर बेचने पर जुर्माना व जेल का प्रावधान भी किया गया है। हालांकि जनपद में इस तरह के पनीर की बिक्री पर रोक नहीं है। इधर डेयरी पनीर जो दूध से बना है उसके नमूने भी फेल हुए हैं। इसको लेकर पनीर खरीदते समय सावधानी बरतने की जरूरत है।
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इस तरह करें पनीर में मिलावट की पहचान: देखें, सूंघें और चखें, यह तीन सूत्र पनीर की खरीदते समय अपनाएं। असली पनीर छूने पर मुलायम होता है। सूंघने पर दुर्गंध आए तो कतई न खरीदें वहीं चखने पर स्वाद ठीक लगे तो पनीर ठीक है। मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी विनोद पांडेय ने बताया कि पनीर में मिलावट की पहचान आयोडीन परीक्षण से की जा सकती है। पनीर में दो बूंद आयोडीन डालने पर रंग गाढ़ा नीला हो जाए तो मिलावट तय है।
स्टार्च व स्किम्ड मिल्क पाउडर की मिलावट आम: पनीर की लागत घटाने और अधिक मुनाफा के लिए कारोबारी दूध से घी निकाल लेते हैं। इसके बाद पनीर बनाने में स्टार्च की मिलावट कर रहे हैं। वहीं सस्ता स्किम्ड मिल्क पाउडर मिलाकर भी पनीर बनाया जा रहा। गर्म दूध में स्किम्ड पाउडर मिलाकर बना पनीर वजन में अधिक हो जाता है। हालांकि जरूरी वसा की कमी रहती है तो पनीर मुलायम नहीं रहता है।
जानें क्या है एनालॉग पनीर: एनालॉग पनीर नॉन डेयरी पनीर है। यह पनीर दूध/डेयरी वसा के बजाय वनस्पति तेल या अन्य तेल, प्रोटीन व अन्य रसायनों से मिलाकर बनाया जाता है। यह एक सस्ता होता है। इसका स्वाद फीका होता है जो दूध से बने पनीर से अलग है।
पनीर के लिए गए व फेल नमूने: वर्ष 2024-25 में पनीर के कुल 21 नमूने लिए गए। इसमें से 13 नमूने फेल हो गए। वहीं, केवल आठ नमूने सुरक्षित पाए गए। वर्ष 2025-26 में पनीर के कुल 26 नमूने लिए गए। इसमें से 18 नमूने फेल हो गए। केवल आठ नमूने सुरक्षित पाए गए।
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