‘कानपुर की पहचान उद्योगों से थी, जो अब खत्म होती जा रही है। शहर का औद्योगिक विकास बहुत जरूरी है।’ यह बात मंगलवार को पीपीएन डिग्री कालेज में अर्थ शास्त्र विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. एमए खान ने कही।
वह एएनडी कालेज में ‘कानपुर के औद्योगिक एवं वाणिज्यिक विकास का इतिहास’ विषय पर हुई गोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि कभी लाल इमली, एल्गिन, स्वेदशी और कॉटन मिल से शहर की पहचान हुआ करती थी। पुराने औद्योगिक स्वरूप को एक बार फिर वापस लाने की जरूरत है।
शहरी विकास सिर्फ सरकार के भरोसे रहकर संभव नहीं है। ट्रैफिक, स्वच्छता और सुरक्षा व्यवस्था में आम आदमी की भी भागीदारी जरूरी है।
विशिष्ट अतिथि वीएसएसडी कालेज में इतिहास विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर अनिल मिश्रा ने अंग्रेजों के कानपुर आने, बीआईसी की स्थापना, जेके ग्रुप व मिर्जा ग्रुप और शहर की मिलें बंद होने के बाद पनपे पान मसाला, पॉलिथीन और लेदर उद्योग के जरिए कानपुर के इतिहास पर चर्चा की।
उन्होंने कानपुर की गल्ला मंडी और कपड़ा बाजार के लिए देश-विदेश में प्रसिद्ध ‘झाड़े रहो कलक्टरगंज, हटिया खुली बजाजा बंद’ कहावतों के बारे में भी बताया। इससे पूर्व अर्थ शास्त्र और इतिहास विभाग की ओर से आयोजित गोष्ठी का शुभारंभ डॉ. खान और प्राचार्य डॉ. नूतन वोहरा ने दीप जला कर किया।
इस मौके पर 28 जनवरी को हुई क्विज और निबंध प्रतियोगिता की विजेताओं को भी पुरस्कृत किया गया। डीएवी कालेज के डॉ. सर्वेश्वर राम, डॉ. मोहना सक्सेना, डॉ. प्रीति त्रिवेदी, डॉ. अर्चना त्रिपाठी, डॉ. पूनम, डॉ. रश्मि, सदफ निजाम और ज्योति सिद्धार्थ मौजूद रहे।