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Kanpur News: देसी गाय साहीवाल... अमृत जैसा दूध, गुणों में भरपूर, रोग रहें दूर

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कानपुर। देसी गाय साहीवाल का जवाब नहीं। गुणों में भरपूर, दूध जैसे अमृत, बीमारियों को तो अपने पास फटकने भी नहीं देती। गर्मी भी 45 डिग्री सेल्सियस तक सहन कर लेती है जबकि हाइब्रिड फ्रीजियन गाय जरा सी गर्मी में ही हांफती रहती हैं। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विवि का पशुपालन एवं दुग्ध विभाग अभियान चलाकर आम लोगों और खासकर किसानों को साहीवाल गाय की ये खूबियां बता रहा है।
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लोगों को यह भी समझाया जा रहा है कि कानपुर मंडल, बुंदेलखंड जैसे क्षेत्रों के लिए यह गाय सर्वथा उपयुक्त है, इसलिए हाइब्रिड फ्रीजियन गाय के स्थान पर ये गायें ही पालें। देसी गायें मजबूत होती हैं और कम बीमार पड़ती हैं।रा ष्ट्रीय नीति के तहत देसी गायों के पालन को बढ़ावा देने के लिए यह अभियान शुरू किया गया है। लोग जागरूक हो सकें, इसके लिए विभाग के प्रोफेसर डॉ. वेद प्रकाश की- भारतीय गायें-अनमोल रत्न, नामक पुस्तक ग्राम पंचायतों में बांटी जा रही है। इससे लोग साहीवाल और दूसरी देसी गायों की अहमियत जान सकें। डॉ. प्रकाश का कहना है कि अभियान का उद्देश्य है कि लोग हाइब्रिड और विदेशी गायों के स्थान पर देसी गायों को पालें। लोग अधिक दूध के चक्कर में हाइब्रिड नस्ल को अधिक पाल रहे हैं।
फ्रीजियन के दूध के साथ रोग भी
उन्होंने बताया कि फ्रीजियन 15 से 20 लीटर दूध देती है और साहीवाल छह से आठ लीटर। विभिन्न शोधों से साबित है कि संकर नस्ल और यूरोपीय नस्ल फ्रीजियन गाय के दूध में बीटा केसीन जीन (ए1) होता है। यह टाइप-1 डायबिटीज, हृदय रोग, ऑटिज्म, सीजोफ्रेनिया, आंत्र सिंड्रोम, बांझपन, त्वचा रोग आदि रोगों के लिए जिम्मेदार होता है। बीमारियों से बचाता है देसी गाय का दूध साहीवाल और दूसरी देसी गायों के दूध में ए2 होता है। यह अमीनो एसिड की लंबी शृंखला होती है। यह इन सब रोगों से बचाव करती है। इसके साथ ही बीटा केसीन जीन (ए-2) बच्चों के लिए बहुत लाभकारी होता है। इसमें ओमेगा-3 फैटी एसिड भी होता है। डॉ. प्रकाश ने बताया कि देसी गायों में साहीवाल के अलावा गीर, रेड सिंधी, कांक्रेज आदि के दूध में ए2 पाया जाता है।
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