फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

स्वदेशी रॉकेट ‘पिनाक’ के ट्रायल में फेल होने से काम रुका

Mon, 07 Nov 2016 12:17 AM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
विज्ञापन
ट्रायल में फेल होने से काम रुका
विज्ञापन
कम दूरी की मारक क्षमता वाले देश के सबसे उन्नत स्वदेशी राकेट ‘पिनाक’ के ट्रायल में फेल होने से शहर में स्थापित होने वाले पिनाक सेक्शन का काम ठप हो गया है। आर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड की मंशा थी कि शहर की आर्डनेंस फैक्ट्री में पिनाक सेक्शन बनाकर इस राके ट से संबंधित सभी तरह के उपकरणों का उत्पादन एक जगह पर होने लगे। पर अब माना जा रहा है कि रक्षा मंत्रालय की जांच पूरी होने तक पिनाक सेक्शन स्थापित नहीं हो पाएगा।  
विज्ञापन

डिफेंस फैक्ट्रियों के सूत्र बताते हैं कि पिनाक राकेट में इस्तेमाल होने वाले तमाम तरह के कम्पोनेंट देश भर की रक्षा फैक्ट्रियों में अलग अलग तैयार होते हैं। कानपुर में राकेट में इस्तेमाल होने वाले ट्रांसफार्मर से संबंधित व कम्पोनेंट तैयार किए जाते हैं। ये कम्पोनेंट शहर की दो फैक्ट्रियों में अलग अलग डिपार्टमेंट में तैयार होते हैं। इससे अव्यवस्था पैदा होती है और प्रोडक्शन प्रभावित होता है। इस वजह से यहां पिनाक सेक्शन बनाकर सभी तरह के कम्पोनेंट का प्रोडक्शन एक जगह शुरू करने की योजना बनी। बिल्डिंग बनकर तैयार हो गई है लेकिन मशीनों की शिफ्टिंग का काम ठप हो गया है। इसका कारणपिनाक का ट्रायल में फेल होना बताया जा रहा है। 
नहीं शुरू हुआ पिनाक का प्रोडक्शन
स्वदेशी राकेट ‘पिनाक’ का प्रोडक्शन देश की सभी फैक्ट्रियों में अभी भी शुरू नहीं हो सका है। शहर की फील्डगन फैक्ट्री को अभी तक इसके कम्पोनेंट प्रोडक्शन शुरू करने का आदेश नहीं मिला है। इसी तरह महाराष्ट्र की चांदा आर्डनेंस फैैैक्ट्री को प्रोडक्शन का आर्डर नहीं मिला है। यहां पर राकेट में बारूद भरने का काम होता है। सूत्र बताते हैं कि रक्षा मंत्रालय की जांच में कुछ ऐसी फैक्ट्रियां चिन्हित की गई हैं जहां से निकले प्रोडक्ट मानक पर खरे नहीं हैं। आशंका इस बात की भी है कि कहीं इन फैक्ट्रियों से कम्पोनेंट बनाने का काम ही न छीन लिया जाए। हालांकि आर्डनेंस फैक्ट्री ने अपने यहां प्रोडक्शन शुरू होने का दावा किया है। 
विज्ञापन

यह था मामला  
पिनाक राकेट नौसेना के एक परीक्षण में लक्ष्य भेदने में असफल रहा। पांच किलोमीटर पर निर्धारित टारगेट के बजाय राकेट दो सौ मीटर पर ही दग गया। इससे सेना को नुकसान होते बचा। भरोसेमंद मिसाइल के लक्ष्य साधने में असफल होने पर रक्षा मंत्रालय ने जांच बैठा दी है। फिलहाल देश की पांच आर्डनेंस फैक्ट्रियों में बन रहे इसके कम्पोनेंट के निर्माण पर रोक लगा दी गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें