कानपुर के हैलट और सीएचसी सरसौल में भर्ती रोगियों में कोरोना के लक्षण न उभरने पर चिकित्सा विज्ञानियों को यह संकेत मिलने लगा है कि और भी साइलेंट कैरियर हो सकते हैं जिनकी स्क्रीनिंग न होने से पता नहीं चल सका। इसके साथ ही यह स्थिति समूह प्रतिरोधक क्षमता (हर्ड इम्युनिटी) विकसित होने के भी संकेत दे रही है।
अगर समूह प्रतिरोधक क्षमता होने लगी तो कोरोना का खात्मा हो जाएगा। लोगों को संक्रमण तो होगा लेकिन पता ही नहीं चलेगा और वे खुद ठीक हो जाएंगे। डॉक्टरों का कहना है कि अगर जमातियों की जांच न होती तो पता ही नहीं चलता कि वे कोरोना के रोगी हैं। उनमें कोई लक्षण ही नहीं हैं। इसी तरह और भी लोग हो सकते हैं।
कुछ लोग संक्रमित होने के बाद ठीक भी हो गए होंगे। जिला महामारी विशेषज्ञ डॉ. देव सिंह का कहना है कि शरीर की प्रतिरोधक क्षमता अगर मजबूत हो तो पता भी नहीं चलता और रोगी ठीक हो सकता है। जिनकी प्रतिरोधक क्षमता कम होती है उन्हीं के लिए यह घातक हो सकता है। शहर में मिले कोरोना के 11 रोगियों का अध्ययन फिलहाल नजीर के तौर पर किया जा रहा है।