क्यों बनेगा रिसर्च स्टेशन
प्रोफेसर ढींगरा ने बताया कि पृथ्वी की कक्षा से चंद्रमा तक जाने या अन्य किसी भी ग्रह तक जाने के लिए काफी ईंधन खर्च करना पड़ता है। चंद्रमा पर रिसर्च स्टेशन बनने से अन्य ग्रहों पर जाना आसान हो सकेगा। इससे दूसरे ग्रहों की दूरी पता चल सकेगी।
इसलिए की जा रही है पीने योग्य पानी की तलाश
प्रो. ढींगरा ने कहा कि पृथ्वी के आसपास सेटेलाइट रेडियो फ्रीक्वेंसी की भीड़ है। चंद्रमा के आसपास ना सेटेलाइट है ना रेडियो फ्रिक्वेंसी। चंद्रमा पर टेलिस्कोप से देखेंगे, तो एक नया ब्रह्मांड देखने को मिल सकता है। यही वजह है कि चंद्रमा पर पीने योग्य पानी की तलाश की जा रही है।
इसलिए चंद्रयान को लगेंगे 40 दिन
नील आर्मस्ट्रांग चार दिन के भीतर ही चांद पर पहुंच गए थे, लेकिन चंद्रयान 40 दिन में चांद तक पहुंचेगा के सवाल पर प्रो. ढींगरा ने कहा कि यह सब ईंधन अर्थव्यवस्था का मामला है। छोटी यात्राओं के लिए बहुत अधिक ईंधन की आवश्यकता होती है। चंद्रयान को चंद्रमा की ओर धकेलने के लिए गुरुत्वाकर्षण सहायता तंत्र की मदद ली जा रही है। इसलिए ज्यादा समय लग रहा है।