दुश्मनों की गोलियों का करारा जवाब देने के लिए भारतीय सेना अब और अधिक शक्तिशाली होने जा रही है। सेना को आधुनिक हथियारों से लैस करने का ये कदम अब पूरा होने को है। पढ़िए ये रिपोर्ट...
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तीन किलो की ‘जेवीपीसी’ चलाती है एक मिनट में 900 गोलियां
कानपुर की स्मॉल आर्म्स फैक्ट्री (एसएएफ) और एआरडीई पुणे ने मिलकर ज्वाइंट वेंचर प्रोटेक्टिव कारबाइन (जेवीपीसी) बनाई है। कारबाइन को सीआरपीएफ, आईटीबीपी, बीएसएफ ट्रायल में पास कर चुकी है। 20 मार्च को सेना इसका ट्रायल करेगी। एसएएफ में गुरुवार को हुई पत्रकार वार्ता में यह जानकारी एसएएफ के महाप्रबंधक एचआर दीक्षित ने दी। महाप्रबंधक ने बताया कि जेवीपीसी पूरी स्वदेशी है।
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स्मॉल आर्म्स फैक्ट्री (एसएएफ) और एआरडीई पुणे ने मिलकर बनाई है कारबाइन
यह कारबाइन जर्मनी की हेकलर एंड कोच (एचके) कारबाइन और बेल्जियम की फेन कारबाइन को टक्कर देती है। विश्व में इन दोनों कारबाइनों को बेहतर माना जाता है। जेवीपीसी की डिजाइन इनसे मेल खाती है और दोनों के मुकाबले यह हल्की है। कारबाइन के पुर्जे कानपुर और दक्षिण के कुछ राज्यों की औद्योगिक इकाइयों से लिए गए हैं। छत्तीसगढ़ पुलिस ने 640 कारबाइन खरीद का आर्डर दिया है। जबकि सीआरपीएफ ने अगले पांच सालों के लिए 30-35 हजार कारबाइन की डिमांड भेजी है।
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सीआरपीएफ, आईटीबीपी, बीएसएफ के ट्रायल में हुई पास, सेना भी करेगी परीक्षण
महाप्रबंधक ने बताया कि सेना की जरूरतों को ध्यान में रख एलएमजी (लाइट मशीन गन) 7.62 एमएम भी बनाई गई है। मशीनगन में एक स्पेशल कोटिंग की गई है, जिससे फायर होने के बाद गन काली नहीं पड़ेगी। इस गन के लुक पर भी ध्यान दिया गया है। सेना जल्द इसका ट्रायल करेगी। वार्ता के दौरान अपर महाप्रबंधक गगन चतुर्वेदी, अपर महाप्रबंधक के बासु, अपर महाप्रबंधक हितेंद्र सिंह, संयुक्त महाप्रबंधक पवन कुमार, कार्य प्रबंधक एसके शर्मा, बैकुं ठ तिवारी, अमित सिन्हा आदि रहे।
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जेवीपीसी की खासियत
- फोटो : अमर उजाला
जेवीपीसी की खासियत
कैलिबर 5.56 एमएम
लेंथ 550-700 एमएम
वजन 3 किलो बिना मैग्जीन
रेंज 200 मीटर
रेट आफ फायर 900 राउंड पर मिनट
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एलएमजी (लाइट मशीन गन )
- फोटो : अमर उजाला
एलएमजी (लाइट मशीन गन )
एलएमजी 7.62एमएम
कैलिबर 7.62एमएम
लेंथ 1200 एमएम
वजन 9 किलो 10 ग्राम
रेंज 800 मीटर
रेट आफ फायर 600 राउंड पर मिनट
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रिवाल्वर
- फोटो : अमर उजाला
आईआईटी की मदद से तैयार .38 बोर रिवाल्वर
कई बार परीक्षण के दौरान फेल हो चुकी .38 बोर की रिवाल्वर को आईआईटी कानपुर की मदद से तैयार कर लिया गया है। इसके सफल परीक्षण का दावा किया गया। यह रिवाल्वर पुलिसकर्मियों के लिए बनाई गई है।
खासियत
कैलिबर .38 बोर
वजन 1 कि लोग्राम
लेंथ 231.04 एमएम
लेंथ आफ बैरल 101.50 एमएम
रेंज 25 मीटर
17 को प्रदर्शनी
महाप्रबंधक ने बताया कि 17 मार्च को समाज सदन अर्मापुर में लगने वाली प्रदर्शनी में निर्माणी की ओर से तैयार किए गए उत्पादों को प्रदर्शन के लिए रखा जाएगा। इसके अलावा अन्य उत्पाद भी प्रदर्शित किए जाएंगे।
निर्माणी को बनाया जा रहा आधुनिक
महाप्रबंधक ने बताया कि भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए निर्माणी का आधुनिकीकरण किया जा रहा है। इस वर्ष 15 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। जबकि आने वाले वित्तीय वर्ष में भी करीब 12 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि इंडो-डेनिश टूल रूम की सहायता से फैक्ट्री के कर्मचारियों को भी प्रशिक्षित किया जा रहा है। इस वर्ष एक बैच (25 सदस्य) का प्रशिक्षण हो चुका है। जल्द ही अन्य बैच का प्रशिक्षण पूरा होगा।