कानपुर। भारत 2040 तक अपना स्पेस स्टेशन स्थापित करेगा। यह कदम न केवल देश की अंतरिक्ष शक्ति को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाएगा बल्कि युवाओं और वैज्ञानिकों के लिए नए शोध अवसरों के द्वार भी खोलेगा। आईआईटी जैसे संस्थानों से जुड़े वैज्ञानिकों के साथ मिलकर रिसर्च की जाएंगी। यह बातें आईआईटी कानपुर में चल रही दो दिवसीय इंजीनियर्स कॉन्क्लेव में शामिल होने आए इसरो के पूर्व चेयरमैन डाॅ. एस सोमनाथ ने मीडिया से बातचीत में मंगलवार को कहीं। उन्होंने कहा कि स्पेस स्टेशन बनने के बाद 35 सेक्टरों में शोध पर काम किया जाएगा।
डॉ. सोमनाथ ने कहा कि आने वाले दो दशकों में भारत अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा। इसरो अब केवल रॉकेट और सैटेलाइट लांच करने तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि देश के प्रमुख तकनीकी संस्थान जैसे आईआईटी, आईएसईआर, एनआईटी और डीआरडीओ के साथ मिलकर विभिन्न क्षेत्रों में शोध किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि भारत का प्रस्तावित स्पेस स्टेशन एक बहुउद्देशीय अनुसंधान केंद्र होगा। जहां माइक्रोग्रैविटी (सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण), अंतरिक्ष चिकित्सा, सामग्री विज्ञान, ऊर्जा उत्पादन, सैटेलाइट तकनीक और जैव विज्ञान जैसे क्षेत्रों पर शोध किया जाएगा। यह स्टेशन भारतीय वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को वैश्विक स्तर की सुविधाएं प्रदान करेगा जिससे वह अंतरिक्ष विज्ञान में नई खोजें कर सकेंगे।
आईआईटी कानपुर सहित देश के तकनीकी संस्थानों के छात्रों को भी इससे बड़ा लाभ मिलेगा। उन्हें इसरो और अन्य वैज्ञानिक संस्थाओं के साथ संयुक्त परियोजनाओं में काम करने का अवसर मिलेगा। छात्र न केवल स्पेस रिसर्च, रोबोटिक्स, डेटा एनालिटिक्स, एआई और मशीन लर्निंग के क्षेत्रों में व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करेंगे बल्कि भविष्य में अंतरिक्ष अभियानों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग परियोजनाओं का हिस्सा भी बन सकेंगे। विकसित देशों में अंतरिक्ष युद्ध के खतरे के सवाल पर उन्होंने कहा कि ध्यान रखें कि अंतरिक्ष युद्ध के लिए नहीं है। फिर खुद को तैयार रखना होगा।