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रियल ठग्स ऑफ हिंदोस्तांः डंके की चोट पर 'मीठा जहर' बेचने वाला यह व्यापारी खुद को कहता है ठग

Fri, 09 Nov 2018 05:03 PM IST
सलोनी भल्ला, कानपुर
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कानपुर के एक मशहूर व्यापारी ने डंके की चोट पर खुद को 'ठग' घोषित कर रखा है। उन्होेंने साफ-साफ शब्दों में अपनी दुकान के बाहर लिख रखा है ''ऐसा कोई सगा नहीं जिसको हमने ठगा नहीं'। हम बात कर रहे हैं प्रकाश पांडेय की। प्रकाश पिछले पांच दशकों से कानपुर समेत देश के तमाम शहरों में 'ठग्गू के लड्डू' नाम से मिठाई की दुकानें चला रहे हैं।  
 
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कानपुर शहर में एेसा कोई बचा नहीं जिसे इस ठग ने ठगा नही। ठगीे के लिए मशहूर प्रकाश पांडेय खुद यह बात कहते हैं कि देशभर से लोग मेरा मीठा जहर खाने यहां अाते हैं। इन्हें लोग 'ठग्स ऑफ कानपुर'  भी  कहते हैं। शहर में इस दुकान की मिठाई, चाट अौर बदनाम कुल्फी ने अपनी एक अलग पहचान बना रखी है। जिस किसी को भी यहां के व्यंजनों का  स्वाद लग जाता है फिर वो यहीं का होकर रह जाता है। देश भर के अलग- अलग शहरों और विदेश में बैठे भारतीय 'ठग्गू के लड्डू' के लाजवाब स्वाद को नहीं भूलते हैं।
 
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'ठग्गू के लड्डू' और 'बदनाम कुल्फी' का स्वाद हर जगह मशहूर है। जितनी लोकप्रियता इस दुकान की है, उतना ही आकर्षक है इसका साइन बोर्ड। फिल्म बंटी-बबली का 'ऐसा कोई सगा नहीं, जिसको हमने ठगा नहीं' गाना आपने जरूर सुना होगा। आपको जानकार हैरानी होगी कि इसके बोल कानपुर के एक मशहूर लड्डू के दुकान की थीम से लिए गए हैं। बंटी-बबली यानि अभिषेक बच्चन
और रानी मुखर्जी ने भी यहां के लड्डू का स्वाद चखा है।
 

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कानपुर को स्वाद की सैगात देने वाले 'ठग्गू के लड्डू' के मालिक रामावतार पाण्डेय तो अब हमारे बीच नहीं हैं लेकिन वह शहर को एक एेसी मिठास देकर गए हैं जिसकी शान में कसीदे पढ़े जाते हैं।
पाण्डेय जी के  छोटे बेटे प्रकाश पाण्डेय बताते हैं कि उनके पिता गांधी जी के आदर्शों पर चलने वाले थे। उनको गांधी जी की बात याद थी कि शक्कर मीठा जहर है अौर लड्डू व कुल्फी में शक्कर का भरपूर उपयोग होता है। उन्होंने धंधे में इसे बेईमानी माना और अपने आप को "ठग्गू " कहना शुरू कर दिया।
 
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'ठग्गू के लड्डू' की दुकान के मालिक प्रकाश पांडेय के मुताबिक बदनाम वही होता है, जिसका नाम होता है। बदनामी उसी की होती है, जो फुटपाथ पर बिकती है। महलों में बिकने वाले बदनाम नहीं होती। यही खासियत है उनकी कुल्फी की। इसके लिए उनकी दुकान पर दूर-दराज से ग्राहक आते हैं और बड़े चाव से इसका स्वाद लेते हैं।
 
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पिताजी का एक स्लोगन सबसे ज्यादा चर्चित हुआ वह है "ऐसा कोई सगा नहीं, जिसको हमने ठगा नहीं"। मिठाई हो या कुल्फी स्वाद के मामले में पूरे शहर में इसका कोई जोड़ नही। खानेवालों के पेट भरते नही अौर वे उंगलियां चाटते थकते नहीं।
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