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अपने दम पर भारत बना न्यूक्लियर पावर, शोध और तकनीक से डरे चीन-अमेरिका- पद्मविभूषण चिदंबरम

Mon, 01 Apr 2019 12:29 PM IST
शिखा पांडेय यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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पद्मविभूषण वैज्ञानिक राजगोपाल चिदंबरम
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भारतीय वैज्ञानिकों ने शोध और तकनीक के मामले में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। भारत दुनिया का इकलौता ऐसा देश है जो अपने दम पर न्यूक्लियर पावर बना है। बाकी सारे न्यूक्लियर पावर देशों ने एक-दूसरे को तकनीक विकसित करने में मदद की है। अब हमारे वैज्ञानिक जिस तेजी के साथ अपने शोध और तकनीक का प्रदर्शन कर रहे हैं, उससे चीन, अमेरिका, इस्रायल जैसे कई बड़े देश डरे हुए हैं।
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ये बातें रविवार को आईआईटी कानपुर में पोखरण परमाणु परीक्षण के वैज्ञानिक और भारत सरकार के प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार रहे पद्मविभूषण राजगोपाल चिदंबरम ने कहीं। वह यहां कैंपस में छात्रों द्वारा आयोजित पहले स्टूडेंट रिसर्च कन्वेंशन को संबोधित कर रहे थे। इसमें देशभर के कई बड़े वैज्ञानिकों ने मास्टर्स और पीएचडी के छात्रों से सीधे संवाद किया।

डॉ. चिदंबरम ने हाल ही में वैज्ञानिकों द्वारा अंतरिक्ष में 300 किलोमीटर दूर लो अर्थ ऑर्बिट (एलईओ) में लाइव सेटेलाइट को मार गिराने का भी जिक्र किया। कहा कि यह देश के लिए गौरव की बात है। डॉ. चिदंबरम से कई छात्रों ने एक बेहतर वैज्ञानिक बनने और शोध करने के लिए सवाल भी किए। एक छात्र ने पूछा कि  वह कंफ्यूज है कि वह एक बेहतर शोधार्थी बन सकता है या नहीं। इस पर चिदंबरम ने कहा कि अगर आप किसी सवाल पर अटक जाते हैं और उसके बारे में हमेशा सोचते रहते हैं तो आप एक अच्छे रिसर्चर बन सकते हैं।

डिप्टी डायरेक्टर प्रो. मणिंद्र अग्रवाल, प्रो. संदीप शुक्ला, प्रो. अवनीश अग्रवाल, डॉ. अर्चना भट्टाचार्या, प्रो. रोहिनी गोडबोले, प्रो. मोहुवा बनर्जी, प्रो. अंकुश शर्मा, प्रो. कांतेश बलानी ने भी छात्रों से संवाद किया। इस दौरान प्रोग्राम के ओवरऑल कोआर्डिनेटर अभिनव कुमार, प्रांशु गर्ग, सार्थक गुप्ता, प्रांशू त्रिपाठी आदि छात्र मौजूद रहे। 
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डिफेंस में अच्छे शोध की जरूरत
डीएमएसआरडी के वैज्ञानिक डॉ. एसएम अब्बास ने भी छात्रों से संवाद किया। उन्होंने डिफेंस सेक्टर में हो रहे शोध और जरूरतों के बारे में बताया। कहा कि मौजूदा समय डिफेंस सेक्टर को सरकार मजबूत बनाने में जुटी है। इसके लिए अच्छी तकनीक और शोध की जरूरत है। यह काम आईआईटी जैसे बड़े संस्थानों के छात्र आसानी से कर सकते हैं।

स्टार्टअप से पहले रिसर्च जरूरी
एंटरप्रिन्योरशिप के लिए विशेष संवाद हुआ। मोबियोटिक्स कंपनी के सीईओ तेज पांडेय ने बताया कि अक्सर छात्र पढ़ाई खत्म होते ही स्टार्टअप शुरू कर लेते हैं। ऐसे स्टार्टअप के फेल होने की संभावना ज्यादा होती है। इसलिए स्टार्टअप शुरू करने से पहले रिसर्च करना जरूरी है। मार्केट रिसर्च, कस्टमर की रिसर्च और फंडामेंटल रिसर्च भी करनी पड़ती है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिकल लिमिटेड (एचएएल) के एसेसिरीज कॉम्प्लेक्स के सीईओ राजीव कुमार ने इंडस्ट्रियल रिसर्च और एकेडमिक्स रिसर्च के अंतर के बारे में बताया।
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