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Kannauj: एक बार भी इत्रनगरी के बाशिंदों का दिल नहीं जीत सके निर्दलीय, अब तक 79 ने ठोंकी ताल, नहीं गली दाल

Tue, 02 Apr 2024 06:16 PM IST
शिखा पांडेय तारिक इकबाल, अमर उजाला, कन्नौज

सार

कन्नौज में अब तक हुए सभी चुनाव में दल से जुडे़ प्रत्याशी ही जीते हैं। हर बार चुनाव में बड़ी संख्या में निर्दलीय मैदान में तो उतरते हैं लेकिन कामयाबी नहीं मिलती है।
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कन्नौज द्वार - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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खुशबू के शहर ने बाहर से आए चेहरों पर तो खूब भरोसा जताया, लेकिन निर्दलीय उनके मन को नहीं भाए। यही वजह है कि यहां हुए लोकसभा के किसी भी चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार को कामयाबी नहीं मिल सकी है। यहां हुए हर चुनाव में बड़ी संख्या में निर्दलीय उम्मीदवारों ने ताल तो ठोकी, लेकिन जीत की दहलीज से दूर ही रहे।

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कन्नौज संसदीय सीट पर अब तक हुए 16 लोकसभा चुनाव में कुल 11 चेहरों ने बाजी मारी है। यह सभी चेहरे किसी न किसी दल से ही जुड़े रहे। निर्दलीय उम्मीदवार यहां के बाशिंदों का भरोसा हासिल करने में कभी कामयाब नहीं हो सके। यहां अब तक हुए चुनाव में कुल 167 उम्मीदवार अपनी-अपनी दावेदारी कर चुके हैं। उसमें करीब आधी संख्या 79 निर्दलीय उम्मीदवारों की है।

यहां वर्ष 1967 में हुए पहले ही चुनाव में सिर्फ एक निर्दलीय आरबीएल कटियार मैदान में उतरे थे, लेकिन कुल पांच उम्मीदवारों में वह सबसे आखिरी पायदान पर रहे थे। उन्हें उस चुनाव में कुल 7363 वोट मिले थे। आपातकाल के बाद हुए 1977 के चुनाव में यहां से सिर्फ तीन उम्मीदवार मैदान में थे। विजेता रहे भारतीय लोकदल के रामप्रकाश त्रिपाठी और उपविजेता रहे कांग्रेस के बलराम सिंह यादव के अलावा तीसरे उम्मीदवार निर्दलीय होरीलाल थे। उन्हें सिर्फ 7131 वोट ही मिला था।

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अब तक 10 महिलाएं लड़ीं, पांच निर्दलीय
कन्नौज संसदीय सीट के लिए अब तक हुए सिर्फ आठ लोकसभा चुनाव के दौरान कुल 10 महिलाओं ने ही किस्मत आजमाई है। उनमें कामयाबी सिर्फ एक बार कांग्रेस की शीला दीक्षित और दो बार सपा की डिंपल यादव को ही मिल सकी है। पांच महिलाएं निर्दलीय रही हैं। उन्हें कामयाबी नहीं मिली।

जमानत बचाना हुआ मुश्किल
इत्रनगरी के सियासी दंगल में निर्दलियों ने दावेदारी तो की, लेकिन कामयाबी तो दूर जमानत बचाना मुश्किल हो गया। यह जरूर है कि निर्दलीय उम्मीदवार को एक बार तीसरे और एक बार चौथे नंबर तक पहुंचने में कामयाबी जरूर मिली है। हालांकि वह भी जमानत नहीं बचा सके थे।

अब तक 79 निर्दलियों ने ठोंकी ताल, नहीं गली दाल
कन्नौज संसदीय सीट के लिए हुए अब तक के चुनाव में अब तक कुल 167 उम्मीदवारों ने ताल ठोकी है, उसमें निर्दलियों की संख्या सबसे ज्यादा 79 रही है। इसमें 1967, 1977, 1998, 2000 में एक-एक निर्दलियों ने दावा ठोका। 1996 के चुनाव के दौरान रिकॉर्ड संख्या में निर्दलीय सामने आए। इस चुनाव में कुल 31 प्रत्याशियों में निर्दलियों की संख्या 23 थी। हालांकि उनमें से किसी की जमानत नहीं बच सकी थी।

डिंपल के सामने दल-निर्दल सब रहे थे गायब
सभी चुनाव में दावा जताने वाले निर्दलीय सांसद वर्ष 2012 के उचुनाव में सामने नहीं आए थे। इस चुनाव में जिसने नामांकन भी कराया उसने दावा वापस ले लिया था। किसी उम्मीदवार के सामने न आने पर सपा उम्मीदवार डिंपल यादव को निर्विरोध सांसद निर्वाचित कर दिया गया था।
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24 हजार वोट पाकर जसवंत ने चौंकाया, रामप्रकाश को सिर्फ 87 वोट
वर्ष 1980 के चुनाव में कुल नौ उम्मीदवार थे। उसमें छह निर्दलीय थे। एक निर्दलीय जसवंत ने तब 24880 वोट हासिल कर सभी को चौंका दिया था। तब वह चौथे नंबर पर रहे थे। बाकी निर्दलियों से उन्होंने सबसे ज्यादा वोट हासिल किया था। बाकी के पांच निर्दलीय को मिले कुल वोट उनसे काफी कम रहे थे। इसी तरह निर्दलीय उम्मीदवारों में सबसे कम वोट 1996 के चुनाव में रामप्रकाश को मिला था। उस चुनाव में कुल 31 उम्मीदवारों के बीच वह सिर्फ 87 वोट लाकर सबसे नीचे रहे थे।

किस्मत आजमाई, नहीं मिली कामयाबी
चुनाव कुल उम्मीदवार निर्दलीय उम्मीदवार
1967         05           01
1971           09             03
1977           03           01
1980           09             06
1984           11             06
1989           10             04
1991           13             05
1996           31             23
1998           05             01
1999           16             11
2000           05             01
2004 10             04
2009 16           06
2014 13             04
2019 11             03a
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