कानपुर। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय संबंध एवं शैक्षणिक सहयोग प्रकोष्ठ का तीसरा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित हुआ। इसमें शिक्षाविदों ने भारतीय-रूसी ज्ञान प्रणाली पर विचार रखे। शिक्षाविदों ने कहा कि वेलबीइंग सेंटर और हैप्पीनेस सेंटर की महत्ता बढ़ रही है। रूस के विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों में इसका बढ़चढ़कर प्रयोग हो रहा है। इससे छात्रों की विभिन्न समस्याओं का समाधान करने में सफलता मिली है।
हाइब्रिड मोड में आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन में भारत, रूस समेत अन्य देशों के प्रतिष्ठित विद्वान, शोधकर्ताओं व शिक्षकों ने हिस्सा लिया। शुभारंभ प्रति कुलपति प्रो. सुधीर कुमार अवस्थी ने किया। कॉलेज ऑफ साउदर्न नेवादा (यूएसए) के प्रो. आलोक पांडेय ने भारत की प्राचीन गणित परंपरा और सूत्रों के बारे में बताया। आईआरएसी सेल के डीन प्रो. सुधांशु पांडिया और संयोजक डाॅ. प्रभात द्विवेदी ने सम्मेलन की रूपरेखा प्रस्तुत की। बताया कि संस्कृति, दर्शन, गणित, योग, पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों, मानसिक स्वास्थ्य और सतत विकास जैसे महत्वपूर्ण विषय पर 75 से अधिक शोध प्रस्तुत किए गए। वक्ताओं में एचबीटीयू के डाॅ. योगेश पुरी, रूस की पेंजा स्टेट यूनिवर्सिटी की प्रो. नताल्या एरमाकोवा, डाॅ. आंद्रेई सोरोकिन सहित अन्य शामिल रहे।