शहरी हलचल से दूर तनाव मुक्त माने जाने वाले गांवों के माहौल में भी हाइपर टेंशन की घुसपैठ हो गई है। गांवों की महिलाओं और पुरुषों में हाइपरटेंशन का स्तर शहरियों के नजदीक आ पहुंचा है। यह तथ्य नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे में सामने आए हैं। यही नहीं, शहरी महिलाओं के मुकाबले ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं संयत (मॉडरेट) हाइपर टेंशन की गिरफ्त में अधिक हैं।
सर्वे में कानपुर जिले का आंकड़ा भी दिया गया है। अभी तक यह माना जाता रहा है कि गांवों के माहौल में नगरीय क्षेत्रों जैसा तनाव नहीं है। लेकिन, सर्वे ने इस नजरिये को बदल दिया है। वर्ष 2015-16 में हुए इस सर्वे में ग्रामीण महिलाओं, पुरुषों और शहरी महिलाओं, पुरुषों का हाइपरटेंशन व ब्लड शुगर से संबंधित आंकड़ा दिया गया है।
ग्रामीण महिलाओं की स्थिति
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हाइपर टेंशन के सर्वे में ब्लड प्रेशर की तीन श्रेणी बताई गई हैं। पहली श्रेणी में हल्का ब्लड प्रेशर रखा गया। इसकी माप सिस्टोलिक (अधिकतम) 140-159 और डायस्टोलिक (न्यूनतम) 90-99 रखा गया। इसमें शहरी महिलाओं का प्रतिशत 5.3 है। जबकि, ग्रामीण क्षेत्रों की चार फीसदी महिलाएं इस श्रेणी में पाई गईं।
दूसरी श्रेणी संयत उच्च ब्लड प्रेशर की थी। इसकी माप सिस्टोलिक 160-179 और डायस्टोलिक 100-109 रखी गई। शहरी महिलाओं का प्रतिशत 0.4 और ग्रामीण महिलाओं का प्रतिशत 0.6 है। हाई ब्लडप्रेशर की तीसरी श्रेणी जिसकी माप सिस्टोलिक 180 और डायस्टोलिक 110 है, उसमें शहर और ग्रामीण महिलाओं का प्रतिशत बराबर है।
ग्रामीण पुरुषों की भी बढ़ी संख्या
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हाइपर टेंशन की यही श्रेणियां पुरुषों में भी रखी गईं। पहली श्रेणी में शहरी पुरुषों का प्रतिशत 8.5 और ग्रामीण क्षेत्रों के पुरुषों का 5.9 प्रतिशत पाया गया। संयत उच्च ब्लड प्रेशर में शहरी पुरुषों का प्रतिशत 1.0 और ग्रामीण का 0.9 प्रतिशत पाया गया। तीसरी श्रेणी में शहरी क्षेत्रों के पुरुषों का आंकड़ा 0.5 फीसदी दिया गया। इसमें ग्रामीण क्षेत्रों का आंकड़ा नहीं दिया गया।
- गांवों की लाइफ स्टाइल बहुत तेजी से बदल रही है। नगरीय क्षेत्रों की सुविधाएं गांवों में पहुंच रही हैं। माहौल में भी बदलाव आया है। वैचारिक स्थिति और विकास की भागदौड़ में अब गांव शहर की कतार में आ रहे हैं। इससे हाइपर टेंशन के मामले गांवों में भी बढ़ रहे हैं।
- डॉ. आरती लालचंदानी, वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ