डीएम विशाख जी ने शनिवार को प्लांट का निरीक्षण कर निर्माण की प्रगति देखी तो हैरान रह गए। इसमें अभी भी डेढ़ से दो साल लग जाएंगे। इस पर उन्होंने निर्माण एजेंसी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
कानपुर में जाजमऊ के वाजिदपुर में कॉमन एफ्लूएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) के निर्माण में सुस्ती की वजह से बीते डेढ़ साल से करीब 250 टेनरियों में नियमित उत्पादन नहीं हो पा रहा है। हजारों कर्मचारियों और मजदूरों के हाथ से रोजगार छिन गया है।
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चमड़ा इकाइयों के आर्डर कैंसिल हो रहे हैं। इस सीईटीपी के चालू होने के बाद ही शहर की करीब 500 टेनरियों को नियमित उत्पादन की अनुमति मिलेगी। डीएम विशाख जी ने शनिवार को प्लांट का निरीक्षण कर निर्माण की प्रगति देखी तो हैरान रह गए।
इसमें अभी भी डेढ़ से दो साल लग जाएंगे। इस पर उन्होंने निर्माण एजेंसी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अगले दो महीने में काम में संतोषजनक प्रगति न मिलने पर कार्रवाई के संकेत दिए हैं। अभी तक शहर की टेनरियों से निकलने वाले दूषित उत्प्रवाह का शोधन नौ एमएलडी क्षमता वाले ट्रीटमेंट प्लांट से होता था।
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इससे अधिक उत्प्रवाह होने से गंगा में दूषित पानी जाता था। इस पर एनजीटी ने टेनरियों के उत्पादन पर रोक लगा दी। तय हुआ कि जितना पानी शोधित हो सकता है, उतनी ही टेनरियां चलेंगी। इस पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने प्रतिदिन करीब 250 टेनरियां चलने का रोस्टर जारी किया।
इसे देखते हुए केंद्र सरकार ने 20 एमएलडी के नए प्लांट के निर्माण के लिए 480 करोड़ रुपये का बजट दिया। इसका निर्माण जून 2022 तक पूरा कराने का लक्ष्य है, मगर ऐसा हो पाना संभव नहीं। डीएम को तीन अन्य प्लांटों के निरीक्षण में भी खामियां मिलीं। इस पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी अनिल कुमार को नोटिस जारी करने को कहा है।