राज रतन समूह की तमाम कंपनियों में बुधवार को आयकर अधिकारियों ने टीडीएस की हेराफेरी की जांच की। घंटों चली जांच में करोड़ों के ऐसे भुगतान पाए गए, जिन पर नियमानुसार टीडीएस की कटौती नहीं की गई है।
उधर पुरानी बकाएदारी न अदा करने के चलते राज रतन और नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) के बैंक खाते भी अधिकारियों ने आयकर विभाग से संबद्ध कर दिए हैं।
आयकर विभाग के कमिश्नर (टीडीएस) शांतनु धमीजा के निर्देशन में आयकर अधिकारी श्रीगोपाल गुप्ता, पुरुषोत्तम गुप्ता, इंस्पेक्टर अनुराग बाजपेई, एसके निगम, छोटेलाल आदि की टीम ने राज रतन समूह पर कार्रवाई की।
समूह की कंपनियों राज रतन कास्टिंग प्रा. लि. , राजरतन कारपोरेशन लि. और राज रतन फैशन लि. समेत कुल पांच कंपनियों में निर्धारित टीडीएस की कटौती न किए जाने को लेकर छानबीन की।
सूत्रों के मुताबिक दाल मंडी, नयागंज के अलावा स्वरूपनगर स्थित दफ्तरों में भी दस्तावेजों की पड़ताल की गई। होली की बंदी के चलते नयागंज और दालमंडी के दफ्तरों से अफसरों को कुछ खास सफलता नहीं मिली।
कुल मिलाकर दस करोड़ से ज्यादा के ट्रक भाड़े और कमीशन के भुगतान से संबंधित कागजात हाथ लगे हैं। इस आधार पर टैक्स चोरी की गणना की जा रही है। जल्द ही समूह को नोटिस देकर टीडीएस जमा कराया जाएगा।
उधर पूर्व की बकाएदारी न अदा करने के चलते राज रतन समूह के स्टेट बैंक स्वरूपनगर और सर्वोदय नगर शाखाओं में संचालित बैंक खातों को आयकर विभाग में संबद्ध कर लिया गया है।
इसी तरह एनएचएआई पर 15 लाख से ज्यादा की टीडीएस बकाएदारी के चलते पंजाब नेशनल बैंक की तीन शाखाओं में संचालित खातों को विभाग में संबद्ध किया गया है।