सिक्स पैक बनाने के चक्कर में युवा हारमोंस का इंजेक्शन लगवा लेते हैं। इसका साइड इफेक्ट यह होता है कि शुक्राणु मर जाते हैं और नपुंसकता आ जाती है। मुंबई के सेक्सुअल हेल्थ फिजीशियन एवं काउंसलर प्रोफेसर दीपक के जुमानी ने बताया कि टेस्टोस्टेरॉन हारमोन के इंजेक्शन लगाने से शरीर में यह हारमोन बनना बंद हो जाता है।
इससे एजूस्परमिया रोग हो जाता है। इसमें शुक्राणु घटने लगते हैं और उनकी संख्या शून्य भी हो सकती है। वर्ल्ड डायबिटीज-डे के मौके पर आयोजित केडीएकॉन-2021 में डॉ. जुमानी ने डायबिटीज रोगियों में होने वाली नपुंसकता के नवीनतम उपचार के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि तरीका यह है कि डायबिटीज रोगी से डॉक्टर को खुद उससे यौन शक्ति के संबंध में पूछना चाहिए।
रोगी झिझक की वजह से खुद नहीं बता पाते। उसे बताना चाहिए कि यौन कमजोरियों का इलाज उपलब्ध है। डायबिटीज के कारण रक्तवाहिनियां सिकुड़ जाती हैं और रक्त प्रवाह कम हो जाता है। उन्होंने बताया कि कोरोना काल में नपुंसकता के 42 फीसदी नए रोगी सामने आए हैं। पोस्ट कोविड रोगियों में भी यह दिक्कत बढ़ी है। इसके अलावा मानसिक तनाव से भी यह दिक्कत हो रही है।
पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने पीनाइल इम्प्लांट के बारे में बताया। यह एक तरह का छोटे पाइप होता है जिसे व्यक्ति के अंग विशेष में लगाया जाता है। इसका बटन शरीर के बाहर होता है। उन्होंने बताया कि देसी इम्प्लांट की कीमत करीब 40 हजार और अमेरिकी कीमत सवा लाख है।
डायबिटीज रोगी दिन में छह बार खाएं
केडीएकॉन-2021 में एम्स दिल्ली से मेजर जनरल डॉ. आरके मारवाह ने बताया कि डायबिटीज के रोगियों को दिन में छह बार खाना चाहिए। लोग एक बार में ही खा लेते हैं। इससे ब्लड शुगर लेवल बढ़ जाता है। अगर इसी खाने को दो-दो घंटे में थोड़ा-थोड़ा खाएं तो ब्लड शुगर लेवल नियंत्रित रहेगा।
उन्होंने गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को होने वाली डायबिटीज के संबंध में बताया। कहा कि अगर महिला को पहले से डायबिटीज के बारे में पता है तो गर्भधारण करने के पहले ब्लड शुगर नियंत्रित कर लें। इसका दुष्प्रभाव गर्भस्थ शिशु पर भी पड़ता है। प्रि डायबिटिक को अपनी लाइफ स्टाइल बदलकर खुराक नियंत्रित कर लेनी चाहिए।